सरकारी अस्पतालों में मिले स्टेंडर्ड दवाइयां

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उज्जैन। सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली जैनेरिक दवाइयों का विरोध नहीं है पर मरीजों को जो दवाइयां दी जाती हैं, उनका स्टेंडर्ड तय (दवाइयों की प्रभावशीलता के मापदंड) होना चाहिए। यािन दवाइयों का स्तर इतना होना चाहिए कि वह बैक्टीरिया से लड़ सके और मरीज की बीमारी ठीक हो सके। मप्र चिकित्सा अधिकारी संघ के प्रांतीय सम्मेलन में शामिल होने अाए महासचिव डॉ. माधव हासानी, डॉ.ललित श्रीवास्तव डॉ.आनंद शर्मा ने रविवार को प्रेस से चर्चा में यह बात कही। सम्मेलन में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स की कमी का मुद्दा भी उठा। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा आए दिए नई योजनाएं तो लाई जा रही है लेकिन उसके क्रियान्वयन के लिए मैन पॉवर की कमी है। प्रदेश में सरकारी अस्पताल डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहे हैं। डॉक्टर्स के 7000 पद स्वीकृत हैं, इनमें कार्यरत 3000 ही है, जबकि आवश्यकता 15000 डॉक्टर्स की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय खरे का कहना है कि सरकार दवाइयों की गुणवत्ता की जांच करवाए। जरूरत पड़ने पर अमानक दवाइयों को लेकर जनहित याचिका लगाई जाएगी। हरिफाटक मार्ग स्थित होटल इंपीरियल में आयोजित सम्मेलन में संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय खरे, डॉ. एनके त्रिवेदी, डॉ. सीएम पौराणिक, डॉ. विनोद गुप्ता, डॉ. बीबी पुरोहित, डॉ. अनिल भार्गव, डॉ. सीएम त्रिपाठी, डॉ. महेश मरमट, डॉ. अरुणा व्यास, डॉ. संजय राणा, डॉ. एपी सोेनानिया आदि उपस्थित थे।

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