दो दिन रहेगा पुष्य नक्षत्र

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इंदौर. दीपावली पर्व के पहले इस बार गुरु-पुष्य (गुरुपुष्यामृत) का महासंयोग बन रहा है। यही नहीं पुष्य नक्षत्र 26 घंटे 50 मिनट तक रहेगा। गुरु-पुष्य के साथ ही सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि योग और गजकेसरी योग भी है। दीपावली के पहले खरीदी के लिए पुष्य नक्षत्र का खास महत्व रहता है। इस दिन गुरु-पुष्य के साथ अन्य योग आने से महत्व और बढ़ गया है। महासंयोग में हर तरह की खरीदी, नए कार्य आरंभ श्रेष्ठ है। पंडितों के अनुसार 16 अक्टूबर को सुबह 10.45 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र है। इसके बाद पुष्य नक्षत्र लगेगा, यह अगले दिन (17 अक्टूबर) को दोपहर 1.35 बजे तक रहेगा। वैसे तो 26 घंटे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, लेकिन गुरु-पुष्य का संयोग सर्वश्रेष्ठ है। पुष्य नक्षत्र गुरुवार या रविवार को आता है तो यह श्रेष्ठ माना गया है। पुष्य नक्षत्रों का राजा है। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। फलित ग्रंथों में शनि को इस नक्षत्र का स्वामी माना गया है। गुरु शुभत्व का कारक है और शनि स्थिरता का। पं. सोमेंद्र शर्मा के अनुसार सोना-चांदी सहित अन्य धातु की खरीदी के साथ अन्य शुभ कार्य किए जाएं तो वह स्थिर होकर शुभत्व प्रदान करते हैं। व्यापारी इस दिन जहां परंपरा अनुसार बहीखाते खरीदेंगे वहीं लोग सोना-चांदी, इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सभी तरह की खरीदी करेंगे। यह दिन किसी भी शुभ कार्य के श्रीगणेश, मंत्र सिद्धि, रियल इस्टेट में निवेश, दुकान-शोरूम के उद्घाटन आदि सभी मंगल कार्य के लिए भी सर्वश्रेष्ठ है। पं. अरविंद पांडे का कहना है सर्वार्थसिद्धि-अमृत सिद्धि योग यश, सफलता और सुख-समृद्धि के कारक हैं।

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