पुष्य नक्षत्र पर महामुहूर्त के योग

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इस बार दिवाली बहुत ही खास रहेगी क्योंकि इससे सात दिन पहले लगभग 27 घंटे खरीदी का महामुहूर्त गुरु पुष्य नक्षत्र रहेगा। धन तेरस से पहले लोग दो दिन तक बाजार से पुष्य नक्षत्र के संयोग में खरीदारी कर सकेंगे। 16 अक्टूबर को बनने वाला गुरु पुष्य योग सभी के लिए बहुत खास रहेगा। इस बार पुष्य नक्षत्र पर गुरु उच्च राशि में रहेगा और चंद्रमा भी साथ होने से गजकेशरी राजयोग का संयोग बन रहा हैं। ये संयोग 95 साल पहले 16 अक्टूबर 1919 को बना था। अब अगले 70 सालों तक ऐसा संयोग नहीं आएगा। अब ऐसा संयोग 11 अक्टूबर 2085 को बनेगा। इस संयोग पर गुरु अपनी उच्च राशि में रहेगा और चंद्रमा भी साथ होने से गजकेसरी नाम का राजयोग बन रहा हैं। शुभ योगों में गजकेशरी योग को अत्यंत शुभ फलदायी योग के रूप में जाना जाता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है उस व्यक्ति को जीवन में कभी भी किसी चीज का अभाव नहीं खटकता है। इस योग के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति की ओर धन, यश, कीर्ति स्वत: खींची चली आती है। जब कुण्डली में गुरू और चन्द्र पूर्ण कारक प्रभाव के साथ होते हैं तब यह योग बनता है। लग्न स्थान में कर्क, धनु, मीन, मेष या वृश्चिक हो तब यह कारक प्रभाव के साथ माना जाता है। चन्द्रमा से केन्द्र स्थान में 1, 4, 7, 10 बृहस्पति होने से गजकेशरी योग बनता है। इसके अलावा अगर चन्द्रमा के साथ बृहस्पति हो तब भी यह योग बनता है। ये संयोग खरीदारी का महामुहूर्त माना जा रहा हैं। इस पुष्य नक्षत्र पर गुरु अपनी उच्च राशि में रहेगा। उच्च राशि में गुरु होने से गुरु से संबंधित वस्तुएं खरीदने से लाभ होगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि योग बनने से ये संयोग और भी शुभ हो जाएगा। कुल मिलकर इस बार 16 अक्टूबर को अन्य शुभ योगों के साथ आने वाला गुरु पुष्य संयोग, सुख समृद्धि और संपदा लेकर आएगा।

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