गाना ऐसा गाओ कि सुरों से मिट्‌टी की महक आए : दलेर मेहंदी

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इंदौर. ‘जब मैं हमारे उस्ताद जनाब राहत अली खान साहब के साथ रियाज़ करने बैठता था तो गाने के साथ वे ज़िंदगी के फ़लसफ़े भी सिखाते थे। कहते थे गाना ऐसा गाओ कि सुरों से मिट्‌टी की सौंधी-सौंधी महक आए। सुरों में तुम्हारी अच्छाई भी झलके। ऐसे रमकर गाओ कि सुननेवाले की तबीयत मस्त हो जाए। मैं यही करने की कोशिश कर रहा हूं और जो युवा गाने में नाम बनाना चाह रहे हैं, उनके लिए भी अपने गुरुजी की कही बात ही दोहराता हूं। दलेर मेहंदी। पटियाला घराने की बुलंद आवाज़। ऐसा घराना जो फिरत की बेबाक तानों और सुरकियों में गाने के लिए मशहूर है। इसी घराने के गायक और पंजाबी गानों का मेकओवर करने वाले दलेर मेहंदी सोमवार को शहर में थे। 13 साल की उम्र में एक ज्योतिषी से हुई मुलाक़ात मैं आज तक नहीं भूला। हाथ देखने से पहले उसने पूछा तू बता कि क्या बनना चाहता है। मैंने कहा शहर में मेरे बड़े-बड़े होर्डिंग लग जाए। मैं बड़ी हस्ती बन जाऊं। हर घर में मेरा गाना बजे। फिर उसने हाथ देखा। कहा बेटा तेरे हाथ में सूर्य रेखा तो है ही नहीं। संगीत छोड़ दे। तबाह हो जाएगा। मैंने कहा एक दिन अपने एलबम के साथ मिलने आऊंगा। मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि घुटने मत टेको। चाहे जो हो जाए।

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