लक्ष्‍मीबाई की सुंदरता की परछाई तक नहीं देख पाए अंग्रेज,

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

झांसी. शौर्य और पराक्रम की पर्याय रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को खूब छकाया। कहा जाता है कि‍ अंग्रेज रानी की परछाई तक नहीं देख पाए थे। हालांकि‍, कानूनी मामले में रानी से बातचीत करने उनके महल पहुंचे एक अंग्रेज ने अचानक उन्‍हें करीब से देखा। इतिहासकार ओम शंकर ‘असर’ के अनुसार, अंग्रेज जॉन लैंग ने ‘वांडरिंग्स इन इंडिया’ नामक पुस्‍तक में रानी की सुंदरता का जिक्र भी किया है।

Queen of beuty Rani Laxmibai

ओम शंकर ‘असर’ के मुताबि‍क, 28 अप्रैल 1854 को मेजर एलिस ने रानी को किला छोड़ने का फरमान सुनाया और पेंशन लेकर उन्‍हें रानी महल में ठहरने के आदेश दे दिए। इस वजह से रानी लक्ष्‍मीबाई को पांच हजार रुपए की पेंशन पर किला छोड़कर रानी महल में रहना पड़ा। इस मामले को लेकर रानी ने सलाह के लि‍ए कानून के जानकार जॉन लैंग को महल में बुलाया था।

शाम का वक्त था। महल के बाहर भीड़ जमा थी। झांसी रि‍यासत के राजस्व मंत्री ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए जॉन लैंग के लिए सुविधाजनक स्थान बनाया। इसके बाद संकरे जीने से जॉन लैंग को महल के ऊपरी कक्ष में ले जाया गया। उन्‍हें बैठने के लिए कुर्सी लगी थी और सामने पर्दा पड़ा था। उसके पीछे रानी लक्ष्‍मीबाई, दत्‍तक पुत्र दामोदर राव और सेविकाएं थीं।

‘झांसी क्रांति की काशी’ और ‘महारानी लक्ष्मीबाई और उनकी झांसी’ किताब लिखने वाले इतिहासकार ओम शंकर ‘असर’ के अनुसार, पर्दे के पीछे से रानी जॉन लैंग से बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान नन्हे दामोदर राव ने पर्दा खींच दिया। इसके बाद जॉन लैंग और महारानी आमने-सामने हो गए। इस दौरान रानी को बेहद करीब से देखने का सौभाग्य जॉन को प्राप्त हो गया। इसके बाद उन्‍होंने रानी की सुंदरता की बखान करने के लिए जो शब्‍द लिखे, वह रानी की सुंदरता के बारे में भारतीय इतिहास में एकमात्र उद्गार है।

    'No new videos.'

Leave a Reply

Your email address will not be published.

LIVE OFFLINE
Loading...