इंदौर के लिए डेमू फर्स्ट च्वाइस

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इंदौर जाने-आने के लिए यात्रियों की पहली पसंद डेमू ट्रेन हो गई है। डेमू में ऑफ सीजन में भी यात्रियों की भारी भीड़ है। इंदौर के लिए शुरू से फतेहाबाद होकर जाने वाली ट्रेन लोगों की पहली पसंद है। गेज कन्वर्जन के पहले इस रूट पर मीटरगेज की छह ट्रेनें चलती थीं। सभी फुल रहती थीं। गेज कन्वर्जन के कारण फतेहाबाद रूट 22 महीने बंद रहा। इस दौरान ट्रेन से इंदौर जाने के लिए वाया उज्जैन-देवास एकमात्र रूट था। यात्री सुबह पुणे-इंदौर, अवंतिका एक्सप्रेस और जयपुर-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन से इंदौर जाते थे। हालत ये थी कि इन ट्रेनों में इंदौर के लिए जगह मिलना मुश्किल हो जाती थी। जबसे सुबह 6.30 बजे इंदौर के लिए फतेहाबाद रूट से डेमू शुरू हुई है, इन ट्रेनों में इंदौर का रश खत्म हो गया। डेमू मे यात्री खड़े रहकर भी इंदौर जाना पसंद कर रहे हैं। जिस हिसाब से यात्रियों ने डेमू को पसंद किया है, उसे देखकर साफ है कि फतेहाबाद रूट से इंदौर के लिए ट्रेन सुविधा बढ़ना चाहिए। रेलवे रैक नहीं होने का कहकर सुविधा नहीं बढ़ा रहा। सीनियर पीआरओ जेके जयंत का कहना जब तक अतिरिक्त रैक हमें नहीं मिलता, ट्रेन सुविधा बढ़ाना संभव नहीं है। फतेहाबाद रूट बंद होने तक सुबह 4 से 6 बजे के बीच इंदौर के लिए रोज (वाया उज्जैन-देवास) करीब 300 से अधिक टिकट की बिक्री होती थी। दोपहर 1.30 बजे इंदौर जाने वाली पैसेंजर में तकरीबन 80 से 100 टिकट इंदौर के बिकते थे। फतेहाबाद रूट से डेमू शुरू होने के बाद सुबह उज्जैन-देवास रूट से इंदौर के 50 टिकट भी नहीं बिक रहे। दोपहर की पैसेंजर ट्रेन में भी इंदौर के टिकट की डिमांड आधी रह गई है। फतेहाबाद रूट वाली डेमू ट्रेन से दिनभर में दो हजार लोग इंदौर जाते-आते हैं।

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