एक आइडिया और बदली गांव की किस्मत, गरीबों को दे रहे FREE इंटरनेट

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स्वामी विवेकानंद ने 122 साल पहले 1893 में शिकागो में अपनी प्रतिभा से विश्व को अचंभित कर दिया था। उनका जन्मदिवस 12 जनवरी ‘युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। मध्यप्रदेश के युवाओं में भी हौसलों की कोई कमी नहीं है। यहां भी नौजवानों की ऐसी कई टोलियां हैं, जो लीक से हटकर काम कर रही हैं। इन युवाओं ने हौसले के पंख पर सवार होकर अपने साथ राज्य और देश का नाम दुनिया में रोशन किया है।

धरमपुरी (धार). एक ऐसा युवा जिसने अपनी जिद से गांव को वाई-फाई के जरिए फ्री इंटरनेट दे रहा है। ग्राम सुंद्रैल के सचिन राजपूत ने सात ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेकर गांव की घनी आबादी को पासवर्ड फ्री वाईफाई झोन बना दिया है। उपभोक्ता अब तक मोबाइल-लैपटॉप पर इंटरनेट चलाने के लिए 2जी व 3जी पैक पर 150 से 600 रुपए महीना तक खर्च कर रहे थे। वाईफाई झोन बनने के बाद मात्र 50 रुपए में उन्हें सुविधा मिल रही है और ज्यादा स्पीड भी।

दरअसल, सचिन से प्रभावित होकर उसके दोस्त अमित जाट, विश्वजीत ने मिलकर 25 हजार रुपए एकत्र कर बीएसएनएल से सात ब्रॉडबैंड कनेक्शन ले लिए। इन्हें लगाने के लिए मॉडम टू राउटर का इस्तेमाल किया। दो कनेक्शन के बीच 300 मीटर वर्गाकार दायरा कवर किया। एक कनेक्शन 150 मीटर वर्गाकार एरिया कवर करता है। इसका दायरा छोड़ अगला कनेक्शन इतनी ही दूरी पर स्थापित कर दिया। इसी तरह पूरा वाईफाई झोन बन गया।

फ्री पासवर्ड की सुविधा, 75% आबादी जुड़ी- उपभोक्ताओं को पासवर्ड सुविधा फ्री दी गई है, जिससे गांव की 75 फीसदी आबादी जुड़ चुकी है। 2000 से अधिक उपभोक्ता इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

सचिन व उसके मित्रों ने कोई शुल्क निर्धारित नहीं किया था लेकिन उपभोक्ता जिनका खर्च बच रहा है, वे खुद आगे आकर 50 रुपए महीना देने की स्वीकृति दे रहे हैं। 150 से अधिक उपभोक्ताओं ने रुपए देना भी शुरू कर दिए हैं। सचिन ने बताया सात कनेक्शन का महीने का बिल करीब 5 हजार रुपए आएगा।

अब तक जितने उपभोक्ताओं ने रुपए देने शुरू किए हैं, उन्हीं से 7500 रुपए मिल रहे हैं। अधिक राशि जो मिलेगी, उससे गांव में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना बनाई है। खास बात यह है गरीब तबके और बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए यह सुविधा बिल्कुल फ्री रखी गई है।

केबीसी में गए थे सचिन, हॉटसीट तक नहीं पहुंचे

> सचिन पिछले बरस कौन बनेगा करोड़पति में फास्टेस्ट फिंगर राउंड तक पहुंचे थे। हॉटसीट तक पहुंचने से चूक गए थे।

> इसी बरस एक बैंककर्मी से पूरा गांव परेशान था। सचिन ने अपने साथियों के साथ अनशन कर आवाज उठाई, सफलता मिली।

> पिछले महीने गांव के जर्जर मुख्य मार्ग के लिए अनशन किया। जनप्रतिनिधियों और आला अधिकारियों ने मांग को सही माना उसके प्रयास शुरू हुए हैं।

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