GOOD NEWS: यूनिवर्सिटी बनेगा जीएसआईटीएस, आधुनिक रिसर्च का केंद्र होगा

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इंदौर. प्रदेश का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस (श्री गोविंद राम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस) जल्द ही यूनिवर्सिटी बन जाएगा। यूजीसी ने 55 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर की है। यह ग्रांट रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) में मिलेगी।
इस अभियान के तहत एक स्कीम शुरू की गई है, जिसमें देशभर के 30 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेजों को यूनिवर्सिटी बनाया जाना है। राज्य शासन के तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए काफी प्रयास किया। फिलहाल एसजीएसआईटीएस को तीन माह के भीतर यह ग्रांट मिलने की उम्मीद है।
हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलेगा या फिर यू्निवर्सिटी का। संस्थान प्रबंधन के अनुसार उसका प्रयास सीधे यूनिवर्सिटी बनाने का है। अगर ऐसा होता है तो यह मध्य प्रदेश की दूसरी इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी होगी।
फिलहाल प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज आरजीपीवी (राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी) के दायरे में आते हैं। 1952 में शुरू हुए इस इंस्टिट्यूट को फिलहाल देश के टॉप 50 कॉलेजों में गिना जाता है।
ऐसे तय होगा सफर
– सभी विभागों में रिसर्च के आधुनिक संसाधन जुटाए जाएंगे। प्रोफेसरों के रिसर्च के लिए नए नियम बनेंगे।
– प्रमुख विभागों के लिए नई बिल्डिंग बनेगी। ई-लाइब्रेरी होगी।
– बड़ा ऑडिटोरियम बनेगा। मूल्यांकन केंद्र, परीक्षा केंद्र की अलग बिल्डिंग होगी।
– प्रशासनिक कामकाज के लिए अलग से संकुल बनेगा।
– राज्य शासन की तरफ से मिलने वाली ग्रांट में कई गुना का इजाफा होगा।
चयन क्यों?
– प्रदेश का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित कॉलेज।
– बेहतरीन रिजल्ट, अच्छा प्लेसमेंट और नियमित फैकल्टी।
– लगभग सभी ब्रांच उपलब्ध। सिविल और मैकेनिकल ब्रांच में कट ऑफ प्रदेश में सबसे ज्यादा।
– 4 बॉयज और 2 गर्ल्स होस्टल के साथ ही 44 फैकल्टी क्वाटर्स भी हैं।
आगे क्या- दर्जा मिलने के साथ सुविधाओं का विस्तार
विशेषज्ञों के अनुसार एसजीएसआईटीएस को अगर यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला तो वह कम से कम संभाग के इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता दे सकेगा। उनकी परीक्षा आयोजित करने के साथ ही अपने नाम से डिग्री जारी करने का अधिकार उसके पास आ जाएगा।
फिलहाल इंदौर में ही 55 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। जीएसआईटीएस को अगर डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलता है तो वह अपने छात्रों को डिग्री जारी कर सकेगा। यूजीसी की तरफ से हर साल 10 करोड़ या उससे ज्यादा की ग्रांट अलग से मिल सकेगी।
आधुनिक रिसर्च का रास्ता खुलेगा
उच्च शिक्षा में तेजी से आगे बढ़ने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। उसी दिशा में यह भी एक कदम है। एसजीएसआईटीएस को लेकर तकनीकी शिक्षा विभाग लगातार काम कर रहा है। रूसा की राशि मिलने से यहां आधुनिक रिसर्च का रास्ता भी खुल जाएगा।
-उमाशंकर गुप्ता, उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री

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