हाथ-पैर-दिमाग से कमजोर, ओलंपिक में तीन गोल्ड जीते

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

उज्जैन। उज्जैन के शास्त्रीनगर का 28 वर्ष का दीपक शर्मा मानसिक विकलांग है। हाथ-पैर दिमाग से भी कमजोर। एक समय लोग उसे हीन भावना से देखते थे लेकिन उसने हार नहीं मानी। जीवन में सफल होने के लिए उसने नानाखेड़ा स्थित मनोविकास विद्यालय में रहकर कई चींजे सीखकर खुद को बदल लिया। यही नहीं खेल में चैम्पियन होने के साथ ओलंपिक तक गया और गोल्ड मैडल जीतने के बाद अब नौकरी कर परिवार चला रहा है। मानसिक विकलांगता के बीच दीपक ने जीवन में कई-उतार-चढ़ाव देखे। पांचवीं तक पढ़े दीपक ने नानाखेड़ा मनोविकास विशेष विद्यालय जाकर शिक्षकों से सामान्य कामकाज के तौर-तरीके सीखे। खेलों में रुचि होने से विद्यालय के कोच गोविंद छापरवाल ने उसे इतना ट्रेंड कर दिया कि हाल ही में ग्रीस एथेंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खेलों में उसे स्पेशल ओलंपिक की भारतीय बास्केट बाॅल टीम से खेलने का मौका मिला और पाकिस्तान के विरुद्ध सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर दीपक ने तीन गोल्ड मैडल जीते। विद्यालय में उसके सम्मान के बाद भास्कर से चर्चा में उसने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया। परिवार चलाने के लिए वह नौकरी की तलाश में था पर विकलांगता आड़े रही थी लेकिन उसकी मेहनत लगन ने अब उसे नौकरी भी दे दी। मनोविकास विद्यालय में ही वह 4 हजार रुपए मासिक वेतन पर नौकरी कर अन्य मानसिक विकलांगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बना गया।

    'No new videos.'

Leave a Reply

Your email address will not be published.

LIVE OFFLINE
Loading...