बायपास सर्जरी डेढ़ की बजाय एक लाख में

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भोपाल. राजधानी में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होने के साथ ही गंभीर बीमारियों का इलाज भी 10 से 20 फीसदी तक सस्ता हुआ है। पहले निजी अस्पतालों में एंजियोग्राफी की फीस 14 हजार रुपए थी, जो अब घटकर 10 हजार रह गई है। इसी तरह किडनी, लिवर, लंग और ब्रेन से संबंधित बीमारियों के इलाज के पैकेज घटे हैं। इसका सीधा फायदा उन मरीजों को हुआ है, जो इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई अथवा चेन्नई के अस्पतालों का रुख करते थे। इसकी मुख्य वजह शहर में एम्स की आहट से मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल्स का शुरू होना रही। नर्सिंग होम एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक तीन साल पहले तक शहर में केवल एक प्राइवेट हार्ट हॉस्पिटल था, जिनकी संख्या अब बढ़कर 8 हो गई है। इसी अवधि में कैंसर के दो, लिवर डिसीज के दो और न्यूरोसाइंस के तीन हॉस्पिटल शुरू हुए हैं। इन हॉस्पिटल के शुरू होने से राजधानी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ी है। इससे अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज के देने डॉक्टर और हॉस्पिटल डायरेक्टर्स ने चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया है। एसोसिएशन पदाधिकारियों के मुताबिक अगले दो साल में शहर के निजी अस्पतालों में हार्ट और लिवर ट्रांसप्लांट ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो जाएगी। जीएमसी के पूर्व डीन डॉ. एनपी मिश्रा का कहना है कि शहर के कई अस्पतालों में सुपर स्पेशिएलिटी डिपार्टमेंट शुरू हुए हैं। यहां मरीजों की संख्या बढ़ने से इलाज के खर्च में भी कमी आई है। अगले कुछ सालों में कुछ और सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल शुरू होंगे। लिवर कैंसर की जांच फाइब्रो स्कैन से गेस्ट्रोकेयर हॉस्पिटल में बीते महीने लिवर संबंधी बीमारियों की जांच के लिए फाइब्रो स्कैन और कोलिंजियोस्कोपी मशीन लगाई गई है। हॉस्पिटल डायरेक्टर डाॅ. संजय कुमार ने बताया कि फाइब्रो स्कैन मशीन से डायबिटीज, मोटापा आैर पेट रोग से संबंधित बीमारियों के मरीजों की लिवर कैंसर की जांच की जाती है। यह मशीन सोनोग्राफी मशीन की तरह काम करती है। डॉ. कुमार के मुताबिक इसी तरह कोलिंजियोस्कोप की मदद से लीवर के अंदर की नलियों की जांच की जाती है।

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