खरगोश-चूहों ने रोकी 25 पीएचडी, बिना शोधार्थियों को दे दी अनुमति

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इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की गंभीर चूक के कारण लगभग 25 शोधार्थियों की पीएचडी अटक गई है। यूनिवर्सिटी ने मामला कार्यपरिषद में लाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश तो की है, लेकिन शोधार्थियों का भविष्य अधर में पड़ गया है।

दरअसल, जूलॉजी के इन शोधार्थियों ने पिछले साल प्रवेश परीक्षा के जरिए पीएचडी में प्रवेश लिया था। जुलाई में ही आरडीसी की बैठक के साथ ही उन्हें सर्टिफिकेट भी दे दिया गया, लेकिन कुछ ही माह बाद लाइफ साइंस कोर्स के तत्कालीन डीन डॉ. सुरेश चांद ने उस पर अपनी टीप लिख दी कि चूंकि इन शोधार्थियों की पीएचडी जानवरों से जुड़ी है और इंस्टिट्यूट एनिमल एथिकल कमेटी ने इन्हें सर्टिफिकेट नहीं दिया है, इसलिए इनकी पीएचडी आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
कुछ माह बाद प्रो. जीपी पांडे डीन बने तो उन्होंने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। फिर मामला स्टेंडिंग कमेटी औैर फिर कार्यपरिषद में पहुंचा, लेकिन वहां से राहत मिलने के बाद भी अभी तक शोधार्थियों की पीएचडी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
केंद्र ने लगा रखी है रोक
दरअसल, केंद्र सरकार ने जानवरों के जरिए रिसर्च पर रोक लगा रखी है। केवल विशेष परिस्थितियों में ही एथिकल कमेटी इसे मंजूरी देती है, लेकिन आरडीसी ने आंख मूंद कर शोधार्थियों को इस रिसर्च की मंजूरी दे दी। अब एथिकल कमेटी का गठन होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अनुमति मिलेगी या नहीं। खरगोश, चूहे, कछुओं और अन्य जानवरों पर रिसर्च की अनुमति मिलना मुश्किल होगी।
कार्यपरिषद के निर्णय को आगे बढ़ा रहे हैं
हम कार्यपरिषद के निर्णय को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि शोधार्थियों के साथ अन्याय न हो। बाकी तकनीकी दिक्कतों को भी दूर करवाने की कोशिश करेंगे।
-प्रो. डीपी सिंह, कुलपति

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