ग्रीन बेल्ट का डायवर्शन, हाईराइज की मंजूरी भी, ऑडी शोरूम संचालक की है जमीन

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इंदौर. एबी रोड से लगी ग्रीन बेल्ट की जमीन पर छह साल पहले डायवर्शन हो गया और इस पर साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज उपयोग के लिए जिले के आला अधिकारियों ने हाईराइज की भी मंजूरी दे दी। अब खुलासा हुआ है कि जमीन ग्रीन बेल्ट की थी। अपर कलेक्टर कोर्ट में यह मामला चल रहा था। अब कोर्ट ने तत्कालीन एसडीओ द्वारा फरवरी 2009 में किए गए डायवर्शन को निरस्त करने का फैसला सुनाते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्र‌वाई के भी आदेश दिए हैं।
राजीव गांधी चौक के पास ग्राम पीपल्याराव की सर्वे नंबर 34/2/2, 35/1/2, 36/1/2, की 3040 वर्गमीटर जमीन ऑडी शोरूम संचालक हरभजन आनंद (आनंद रियल एस्टेट प्रालि) की है। यहां सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज उपयोग के लिए हाईराइज भवन की मंजूरी मिली थी।
जमीन के लिए अधीक्षक भू परिवर्तन, संयुक्त संचालक टीएंडसीपी व आईडीए से अनापत्ति मिली थी। इसके आधार पर एसडीओ ने इसका औद्योगिक उपयोग के लिए डायवर्शन कर दिया। बाद में हाईराइज कमेटी से भी हाईराइज भवन बनाने की मंजूरी दे दी गई। हालांकि मौके पर अभी केवल चौकीदार रूम व स्टोर रूम ही बना है।
जांच रिपोर्ट में पता चला जमीन का उपयोग
दो साल पहले इस मामले में शिकायत हुई थी, जिस पर कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने तत्कालीन सहायक कलेक्टर राजीव मीणा से इसकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि मास्टर प्लान 2021 के तहत जमीन का लैंडयूज क्षेत्रीय उद्यान (ग्रीन बेल्ट) के लिए है।
डाय‌‌‌‌वर्शन गलत था। मामला कलेक्टर ने स्वनिगरानी में लिया और अपर कलेक्टर कोर्ट में प्रकरण चला। कोर्ट में गौरव आनंद ने बताया मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट जरूर है, लेकिन जोनल प्लान योजना क्रमांक पीयू-8 में लैंडयूज औद्योगिक है, इसलिए शासन से मार्गदर्शन लेकर कोर्ट फैसला करे।
कोर्ट ने यह दिया फैसला
अपर कलेक्टर सुधीर कोचर की कोर्ट ने फैसले में लिखा है कि मास्टर प्लान में औद्योगिक उपयोग होने के बाद भी टीएंडसीपी द्वारा लेआउट मंजूर करना गलत था। डायवर्शन भी निरस्त किया जाता है। साथ ही एसडीओ को आदेश दिए जाते हैं कि वे मौके पर निर्मित कमरों को तोड़ें।
हाईराइज की मंजूरी अक्टूबर 2011 तक ही मान्य थी। इसलिए वह स्वत: निरस्त हो चुकी है। अनियमितता के लिए टीएंडसीपी के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने एक महीने में आदेश के पालन की रिपोर्ट मांगी है।

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