26 साल बाद यूनिवर्सिटी को मिलेगा स्थायी डीसीडीसी

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इंदौर। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में 26 साल बाद स्थायी डीसीडीसी (डायरेक्टर ऑफ कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल) की नियुक्ति की आस बंधी है। संभावना है की इसी साल अगस्त में स्थायी डीसीडीसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल इसके लिए विज्ञापन और आवेदन की प्रक्रिया पिछले साल ही पूरी हो चुकी थी। अब इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस पोस्ट के लिए 25 आवेदन तो आए लेकिन उनकी स्क्रूटनी तक नहीं हो सकी थी।अब यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे पहले अब तक 8 बार विज्ञापन जारी हुए और प्रक्रिया पूरी की गई। लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से वह पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार प्रबंधन ने प्रक्रिया अगले माह से आगे बढ़ाने की क्या काम है डीसीडीसी का, क्यों जरूरी है स्थायी डीसीडीसी? : दरअसल यूनिवर्सिटी से एफिलिएशन मांगने वाले कॉलेजों का संचालन नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। बेहतरीन आधारभूत सुविधाएं, लाइब्रेरी, क्वालिटी फैकल्टी से लेकर कॉलेज में यह देखने का जिम्मा डीसीडीसी का ही होता है। डीसीडीसी ही यह तय करता है कि किसी नए कॉलेज को एफिलिएशन दी जाना चाहिए या नहीं। या फिर किसी पुराने कॉलेज की एफिलिएशन का नवीनीकरण किया जाना चाहिए या नहीं। डीसीडीसी द्वारा बनाई गई कमेटी कॉलेजों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपती है। उसके बाद आगे की प्रक्रिया स्टेंडिंग कमेटी औैर कार्यपरिषद के जरिये पूरी होती है। कुल मिलाकर डीसीडीसी का मुख्य कार्य कॉलेजों से कॉलेज कोड 28 का पालन होता है। फिलहाल अस्थायी डीसीडीसी होने के कारण वे पूरी तरह समय नहीं दे पाते। उनके पास पूरे अधिकार भी नहीं है।

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