ऑस्ट्रेलिया से 1 करोड़ की नौकरी छोड़ लौटा

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बुरहानपुर/इंदौर। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से बैंक की नौकरी छोड़ स्वदेश लौटे। सिर्फ इसलिए कि कॅरियर के मामले में भूले-भटके भारतीय युवाओं के लिए कुछ कर दिखाए। उन्होंने ऐसा किया भी। युवाओं के लिए नि:शुल्क कॅरियर काउंसिलिंग की। चार साल में करीब 500 युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनने की राह दिखाई। ये सभी लोग अब अपना मुकाम हासिल कर चुके हैं। यह राह दिखाने वाले शख्स हैं, बुरहानपुर के आदर्श कॉलोनी निवासी आनंद मुंशी। इंदौर जीएसआईटीएस से मैकेनिकल इंजीनियरिंग, डीएवीवी से फायनेंस सिस्टम में एमबीए किया। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मास्टर ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई पूरी की। मेलबर्न की नेशनल बैंक में 2002 से नौकरी की। यहां बतौर बिजनेस इंफार्मेशन एडवाइजर रहे। 2007 से टेलस्ट्रा टेलीकॉम कंपनी में बतौर स्ट्रेटिजी स्पेशलिस्ट रहे। एक करोड़ रुपए का था पैकेज : आनंद ने काम की व्यस्तता के चलते उन्होंने स्वदेश लौटने की योजना बनाई। साथ ही भारतीय युवाओं का भविष्य संवारने के लिए नि:शुल्क कॅरियर काउंसिलिंग की भी सोची। फिर क्या था एक करोड़ रुपए के पैकेज को ठोकर मार आनंद 2011 में भारत लौट आए। आनंद ने कहा जीवन में एक समय ऐसा भी आता है जब रुपया सब कुछ नहीं रह जाता। जो दिल कहे वही काम करो। मैंने भूले-भटके युवाओं को शीर्ष पर लाने का जिम्मा उठाया है। आनंद बुरहानपुर, पूना, इंदौर सहित अन्य जिलों के स्कूल-कॉलेज, कॉर्पोरेट सेक्टर में आनंद काउंसिलिंग और कॉर्पोरेट स्पीकिंग कर चुके हैं। फिलहाल आईआईटी के स्टूडेंट को प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार कर रहे हैं। भारत में ऑस्ट्रेलिया से रजिस्टर्ड पैराडाइस फॉर पिक परफॉरमेंस संस्था शुरू की। यहां भी आनंद ने गुड़गांव की एक्स्ट्रेंचर कंपनी में बतौर बिजनेस कंसल्टेंट और वोडाफोन कंपनी में कॉर्पोरेट आईटी हेड रहे। स्कूल, कॉलेजों में युवाओं की कॅरियर काउंसिलिंग भी जारी रखी। लेकिन काम की व्यस्तता और काउंसिलिंग के लिए पूरा समय नहीं मिलने पर नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने पूरा ध्यान बच्चों का भविष्य संवारने में लगा दिया।

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