अाज सांसद है कभी एसटीडी चलाने वाली

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इंदौर। संसद में महिलाओं को भागीदारी देने वाला महिला आरक्षण विधेयक भले ही राजनीति की बलि चढ़ गया है, मगर मध्यप्रदेश के धार जिले ने इस विधेयक के बिना ही पूरे देश में एक नई मिसाल कायम कर दी है। धार संभवतः देश का एकमात्र जिला है जिसमें शासन और प्रशासन के सारे सूत्र महिलाओं के हाथ में हैं।

किसी ज़माने में राजा भोज और भोजशाला के नाम से चर्चा में रहने वाला ये शहर अब इन धारदार महिलाओं के कारण चर्चा में है, जिन्होंने कड़ा संघर्ष कर अपनी पहचान बनाई और अब धार को एक नई पहचान देने में लगी हैं।

यहां सांसद से लेकर जनपद अध्यक्ष तक सभी 6 पदों पर महिलाएं विराजमान हैं। इतना ही नहीं 15 महिलाएं भी पार्षद के चुनाव में लोगों का भरोसा जीत कर धार को राजनैतिक नेतृत्व दे रही हैं। यह तो हुई राजनीतिक पदों की बात। इस जिले के प्रशासनिक पदों पर कलेक्टर से लेकर कोषालय अधिकारी तक 7 महिलाएं ही सबकुछ संभाल रही हैं।

सांसद सावित्री ठाकुर
धार की सांसद सावित्री ठाकुर की कहानी बिलकुल फ़िल्मी कहानी जैसी है। एक छोटे से गांव में रहने वाली आदिवासी महिला अपनी जीवटता के बल पर किस तरह से ज़िंदगी से लड़ाई लड़ती है और फिर समाज में अपना मुकाम हासिल करती है, सावित्री इसका जीवंत प्रमाण हैं। धार के एक छोटे से गांव कालीकिराय की रहने वाली सावित्री ज़्यादा पढी-लिखी तो नहीं हैं, मगर वो शुरू से अपने अधिकारों के लिए जागरुक रहीं। जीवन यापन के लिए गांव में एसटीडी-पीसीओ का संचालन किया। सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़कर गांव में बचत समूह भी चलाए।
सामाजिक सक्रियता से राजनीति का दरवाजा खुला और पहला चुनाव लड़कर जिला पंचायत की अध्यक्ष बन गई। पिछले लोकसभा चुनाव में गुटबाजी से बचने के लिए पार्टी ने सावित्री को सांसद का टिकिट दिया और चुनाव जीतकर वो संसद के दरवाज़े पर जा पहुंची।

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