केंद्र की नई नीति के तहत शहर के तीन बड़े प्रोजेक्ट को फंडिंग का इंतजार

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इंदौर. केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार ने भले ही कार्यकाल का दूसरा बजट पास कर दिया है, लेकिन शहर के तीन महत्वपूर्ण कॉरिडोर के प्रोजेक्ट को अब भी फंडिंग का इंतजार है। केंद्र से अब तक कोई नई नीति सामने नहीं आई है। ऐसे में इनकी डिमांड और कास्ट दोनों बढ़ती जा रही हैं। ये प्रोजेक्ट 1262.25 करोड़ रुपए के हैं। इनके तहत नगर निगम को जहां बीआरटीएस पर फ्लाय ओवर और फुट ओवरब्रिज बनाना है, वहीं कान्ह (खान) नदी के किनारों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित करना है। उधर, आईडीए को सुपर कॉरिडोर पर बस सिस्टम लागू करने सहित अन्य काम करना हैं।

यूपीए सरकार में जेएनएनयूआरएम के तहत ये प्रोजेक्ट भेजे गए थे, लेकिन तब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से राशि जारी नहीं हो सकी थी। बाद में केंद्र में मोदी सरकार बन गई, लेकिन पहले बजट में इसे लेकर कोई प्रावधान नहीं किया था। तब तर्क दिया इसे लेकर प्लानिंग जारी है, लेकिन दूसरे बजट में भी कुछ नहीं मिला। हालांकि नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दोनों विभागों से कह चुके हैं कि आप तैयारी रखें। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही हम प्रोजेक्ट भेजेंगे और स्वीकृत करवाकर भी लाएंगे। प्रोजेक्ट मंजूर होने पर 50 प्रतिशत राशि केंद्र और 20 फीसदी राज्य शासन देगा। बाकी 30 प्रतिशत राशि निगम और आईडीए मिलाएंगे।
बीआरटीएस कॉरिडोर
कब तक बनेंगे फ्लाय ओवर और फुट ओवरब्रिज
क्या होना है- पांच फ्लाय ओवर (शिवाजी प्रतिमा, पलासिया, विजय नगर, नौलखा और भंवरकुआं चौराहे पर) और आठ फुट ओवरब्रिज बनना हैं।
लागत- 346.25 करोड़ रुपए
अभी स्थिति- जेएनएनयूआरएम के तहत तत्कालीन मंत्री कमलनाथ ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, लेकिन सीएसएमसी के मिनट्स में नहीं आ पाया था।
फायदे- बीआरटीएस पर सीधे जाने वाले ट्रैफिक की बाधा खत्म होगी। चौराहों पर एक से तीन मिनट तक ट्रैफिक रुकने से निजात मिलेगी। जाम नहीं लगेगा। समय और ईंधन की भी बचत होगी।
सुपर कॉरिडोर
भोरासला और देपालपुर चौराहे पर बनना है फ्लाय ओवर
क्या होना है- भोरासला और देपालपुर चौराहे पर फ्लाय ओवर बनना है। यहां बीआरटीएस भी शुरू होगा। बस लेन, स्टॉप, चौराहों का विकास, ड्रेनेज, सीवरेज लाइन, पार्क सहित अन्य काम होना है।
लागत- 417.83 करोड़ रुपए
स्थिति- आईडीए ने संशोधित डीपीआर बनाई थी, लेकिन आचार संहिता लग गई और प्रोजेक्ट केंद्र सरकार तक पहुंच नहीं पाया।
फायदे- नया शहर सुपर कॉरिडोर पर ही बसना है। ऐसे में बाहरी ट्रैफिक के लिए न केवल फ्लॉय ओवर राह आसान करेंगे, बल्कि नए बीआरटीएस रूट के साथ अन्य विकास कार्य भी आसानी से हो सकेंगे।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर
कान्ह के शुद्धिकरण और किनारों के सौंदर्यीकरण का इंतजार
क्या होना है- कान्ह (खान) नदी के दोनों किनारे विकसित होंगे और बस कॉरिडोर बनेगा। रिटेनिंग वॉल बनेगी और सौंदर्यीकरण होगा। 16.10 किमी में सात ब्रिज, 42 पैदल ब्रिज और दो अंडरपास बनना हैं।
लागत- 498.17 करोड़ रुपए
अभी स्थिति- जेएनएनयूआरएम के तहत गठित सीएसएमसी ने मंजूरी दे दी थी।
फायदे- शहर के बीच पैदल और बस में सफर करने वाले यात्रियों को नदी किनारे सीधा रास्ता मिलेगा

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