पितृ पर्वत पर बैठे हैं देश के सबसे ऊंचे हनुमान, 90 टन है वजन, 45 फीट की गदा

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इंदौर। इंदौर में पितृ पर्वत पर अष्टधातु से हनुमानजी की 66 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित हो रही है। इसके 4 अप्रैल को यानी हनुमान जयंती तक पूरा होने की उम्मीद है। यह देश में बैठे हुए हनुमानजी की सबसे ऊंची प्रतिमा है। 2007 से जनसहयोग से बन रही इस प्रतिमा का काफी काम हो चुका है। काम के इसी साल पूरा होने की उम्मीद है। इस प्रतिमा और गदा का निर्माण ग्वालियर के कलाकार प्रभात राय के स्टूडियो में किया गया है।
सरकार की पितृ पर्वत को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है। अभी विजयवाड़ा में हनुमानजी की सबसे ऊंची खड़ी प्रतिमा स्थापित है। इसकी ऊंचाई 135 फीट है। वैसे, खड़े हनुमानजी की 176 फीट की सबसे ऊंची प्रतिमा आंध्र प्रदेश के नरसन्नापेट में बन रही है।

गदा का वजन 21 टन : गत वर्ष हनुमान जयंती पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हनुमानजी की 45 फीट लंबी गदा की स्थापना की गई थी। गदा का निमार्ण भी ग्वालियर में ही हुआ है। गदा का वजन 21 टन है। इसे दो क्रेन और 15 लोगों की मदद से 42 मिनट में ट्राले पर रखा गया था।

प्रतिमा पर विशेष प्रकार की पॉलिश : 90 टन वजनी इस प्रतिमा पर विशेष प्रकार की पॉलिश की गई है जो मौसम से बचाव करेगी। इसे बनाने में दस करोड़ रुपए की लागत आई है। 18 कारीगरों ने 10 से 12 घंटे प्रतिदिन काम कर छह साल में तैयार किया। प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को छह ट्रॉलों की मदद इंदौर लाया गया है।

प्रतिमा पर एक नजर
– 62 फीट चौड़ी
– 66 फीट ऊंची
– 10 करोड़ रु. लागत
– 90 टन वजन
– 45 फीट लंबी गदा

इसलिए कहलाया पितृ पर्वत : पूर्वजों की याद में देव धरम टेकरी को नाम दिया गया पितृ पर्वत। अपनों की याद में 12 साल पहले इस पर्वत पर पौधे लगाने का सिलसिला शुरू हुआ था जो आज लाखों पेड़-पौधों के लहलहाने के साथ अपनों की यादों को ताजा किए हुए है। लाखों पौधे पेड़ों की शक्ल ले चुके हैं। स्मृति दिवस ही नहीं जब भी लोगों को अपनों की याद आती है तो वे पितृ पर्वत पहुंच जाते हैं। यहां छांव में बैठते हैं तो ऐसा महसूस होता है जैसे बड़े-बुजुर्गो की तरह दरख्त भी उन्हें दुलार रहा है। तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय ने पितृ पर्वत पर रोपे गए पौधों को नगर निगम के माध्यम से सहेजने का बीड़ा उठाया था। हर वर्ष बारिश और उसके बाद यहां पौधे रोपे जाते हैं। श्राद्धपक्ष में भी लोग यहां पहुंचते हैं। सर्व पितृ अमावस्या को बड़ी संख्या में पौधे रोपे जाते हैं। किसकी याद में किसने पौधा रोपा गया उसकी नाम पट्टिका भी लगाई जाती है।

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