पहले गुलाबी, फिर काली और अब आ गई महिलाओं की नीली गैंग

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आज-कल झाबुआ जिले के नवापाड़ा गांव के शराबियों के मन में नीली साड़ी वाली महिला गैंग का खौफ समाया हुआ है। इन्हें देखते ही शराबी दौड़ लगा देते हैं। कुछ ने तो इनके डर से शराब को हाथ लगाना ही छोड़ दिया है। ये महिलाएं हाथों में लाठी और नीली साड़ी पहनकर जब समूह में निकलती हैं तो शराबियों के साथ ही गलत काम करने वाले भी इनकी नजरों से बचना ही उचित समझते हैं। नवापाड़ा के अलावा यह क्रांति अब जिले के दूसरे गांव तक भी पहुंचने लगी है। गरीबी के खिलाफ स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक जुट हुईं महिलाओं ने शराबबंदी को मुद्दा बना कर ग्राम में बदलाव लाने का बीड़ा उठाया है। इस एकजुटता का पूरा श्रेय मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयासों का ही नतीजा है।

आजीविका मिशन के तहत नवापाड़ा में 123 महिलाओं के 11 समूह बनाए गए हैं। संगठन की बागडोर अध्यक्ष तेजू बाई ने संभाला है। तेजू बाई ने पूरा ध्यान गांव में फैले शराब के कारोबार एवं शराबियों पर नकेल कसने में लगाया है। शराबियों को देखते ही तेजू बाई और उनके संगठन के तेवर तीखे हो जाते हैं।

मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कालीदेवी संकुल के गांव नवापाडा में सामाजिक बुराइयों को दूर करने के उद्देश्य से समूह का निर्माण किया गया था। इसके लिए 136 परिवारों वाले नवापाड़ा में 11 समूह बनाए गए और 123 परिवारों को एकसाथ खड़ा किया गया। समूहों के संचालन के लिए बैंक भी आगे आए और 5 समूहों को 17 लाख 86 हजार का ऋण दिया। साथ ही समूहों को रिवाल्विंग फंड एवं सामुदायिक निवेश फंड का भी लाभ दिया।

संगठन की अध्यक्ष तेजूबाई टीम के साथ मिलकर गांव के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। समूह ने सबसे पहले शराबियों को समझाइश एवं समूह की ताकत का एहसास कराते हुए गांव को शराब मुक्त कर दिया है। सभी टीम की तरह काम करें एवं एक जैसे दिखें, इसके लिए ड्रेस कोड है। दल की महिलाएं नीली साड़ी पहनकर ही गांव में दबिश देती हैं। तेजूबाई ने बताया कि गांव को शराब मुक्त करने के लिए हमने एक रणनीति के तहत काम किया। जो लोग शराब पीते थे उन्हें ताकत के साथ ही 500 रुपए का अर्थदंड लगाया। पैसे और पिटाई के डर से लोगों ने शराब को तौबा कर दिया है। अब टीम ने शराब के अलावा भी गांव की अन्य समस्याओं को सुनना शुरू किया है। टीम अब आपसी झगड़े, जमीनी विवाद, दहेज लोभियों पर लगाम लगाना, शिक्षा पर जोर और स्वच्छता के प्रति ग्रामीणों को जागरूकता कर रही हैं।
समाज के लिए जरूरी कदम : समूह की महिलाएं समाज को जगाने का कार्य कर ही हैं। शराबियों से शराब छुड़वाकर उन्हें सही राह दिखा रही हैं। ये समूह उन लोगों पर नजर रख रहा है जो शराब पीकर महिलाओं को परेशान करते हैं। ये लोग बच्चों की शिक्षा के साथ ही स्वच्छता के लिए भी लोगों को जगा रही हैं। – एलएम बेलवाल, सीईओ, एनआरएलएम

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर : मप्र राज्य आजीविका मिशन के प्रयास समाज में महिला नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में प्रभावी साबित हो रहे हैं। इनका प्रयास महिला सशक्तिकरण को गति प्रदान करने के साथ महिलाओं के पक्ष में वातावरण निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। – धनराजू एस, सीईओ, जिपं, झाबुआ

महिलाओं के संपूर्ण विकास को लक्षित कर जिले में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। जिससे महिलाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास हो रहा है। नतीजतन पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर वास्तविक नेतृत्व प्रदान करने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। – आशीष शर्मा, डीपीओ, मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, झाबुआ

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