मोशन के जरिए इमोशन दिखाती ‘PIKU’

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‘मद्रास कैफे’ और ‘विक्की डोनर’ जैसी उम्दा फिल्म बनाने वाले निर्देशक शुजित सरकार अब ‘पिकू’ के रूप में एक मार्मिक और खूबसूरत पारिवारिक कहानी लेकर आए हैं।
फिल्म की कहानी दिल्ली के चितरंजन पार्क में रहने वाली पिकू की है। पिकू के पिता बाबा उर्फ़ भास्कर बनर्जी (अमिताभ बच्चन) हैं। 70 साल के भास्कर बनर्जी को कन्सटिपेशन (कब्ज़) है और हर वक्त वह इसी के बारे में बात करते हैं। पेशे से आर्किटेक्ट बेटी पर उनकी देखभाल का जिम्मा है, क्योंकि उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है।
पिता की देखभाल में बिजी पिकू की कोई पर्सनल लाइफ नहीं है। 30 साल की हो चुकी पिकू की उसके पिता शादी भी नहीं कराना चाहते, क्योंकि वह अपनी बेटी से दूर नहीं होना चाहते। वह लड़कों के सामने पिकू का इंट्रोडक्शन कुछ इस तरह कराते हैं- ”Piku is not a virgin and is financially and sexually independent” ताकि बात आगे न बढ़ सके। एक दिन भास्कर पिकू से अपने होम टाउन कोलकाता जाने की इच्छा जाहिर करते हैं और शुरू होती है एक जर्नी।
इस जर्नी में पिकू और उनके बाबा का साथ देते हैं राणा चौधरी (इरफ़ान खान) जो कैब सर्विस के मालिक हैं। पिकू और उनके पिता के अक्खड़ रवैये के कारण कोई भी ड्राइवर इस ट्रिप पर जाने को राजी नहीं होता। ऐसे में, राणा उन्हें इस ट्रिप पर ले जाता है।
फिल्म की कहानी और डायलॉग्स काफी उम्दा हैं। ‘मोशन के जरिए इमोशन’ की फिल्म टैगलाइन को शुजित ने बहुत ही बढ़िया तरीके से प्रस्तुत किया है।
‘पिकू’ में अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और इरफान खान की एक्टिंग बेहतरीन है। इनके अलावा, डॉक्टर के रूप में रघुबीर यादव और मौसी के किरदार में मौसमी चटर्जी ने बढ़िया अभिनय किया है।
फिल्म में सारे गाने बैकग्राउंड में सुनाई देते हैं और कहानी के साथ घुल-से जाते हैं। अनुपम रॉय का म्यूजिक सिंपल मगर टचिंग है।
सिल्वर स्क्रीन पर लंबे अरसे के बाद एक ऐसी फैमिली फिल्म आई है, जो आपको पसंद आएगी। कुछ फ्रेश, इमोशनल और दिल को छू लेने वाली कहानी देखना चाहते हैं तो इस फिल्म को एक बार देखें।

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