छोटा लक्ष्य अपराध है – कलम

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लुटियन दिल्ली का 10 राजाजी मार्ग। यही है पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का बंगला। निचले फ्लोर पर घर और दफ्तर। ऊपरी फ्लोर पर लाइब्रेरी। मैं रात 8 बजे उनसे मिलने पहुंची, तब भी बंगले के बाहर दो स्कूली बसें खड़ी थीं। 70 बच्चे आए थे कलाम से मिलने। अंदर गई तो देखा वेटिंग रूम में 35-40 लोग हैं। इनमें एक आठ-नौ साल की बच्ची भी है।
वह बार-बार दीवार पर लगे कलाम के फोटो के सामने जाती है आैर ‘जय हिंद’ बोलकर मुस्कुराने लगती है। उसके पापा रिहर्सल करवा रहे हैं कि अंदर जाकर क्या बोलना है। तभी मेरी बारी आती है। खूब सारे सवालों का अरमान लिए मैं उनके कैबिन में दाखिल होती हूं और शुरू होता है 85 की उम्र में भी ऊर्जा से भरे डॉ. कलाम से बातचीत का सिलसिला…
1- बातचीत का सिलसिला खुद डाॅ. कलाम ने शुरू किया…
देखो… शहर से निकलो… गांवों में जाओ। वहां कोई किसान मिलेगा जिसने सबसे ज्यादा फसल उगाई होगी। किसी मछुआरे ने सबसे ज्यादा मछलियां पकड़ी होंगी। या प्राइमरी स्कूल का कोई बच्चा जो किसी मछुआरे का बेटा है, मैथ्स में 100 में 100 नंबर लाया होगा। और ये गांव शहरों के बाजू से लगे हैं। दिल्ली के आसपास ही गांव हैं। कोई जाता ही नहीं। पॉजिटिविटी गांवों में मिलेगी।
2-आपको कैसा लग रहा है देश का माहौल?
इकोनॉमिकिली डेवलप हो जाना सबसे अच्छी बात होगी। 1947 से हम विकासशील देश हैं। दुनिया के सैकड़ों देशों में से सिर्फ जी-8 देश ही विकसित हैं। कब ये जी-9 और जी-10 होंगे? सोचो जरा। किसानों को देखो। कितना अच्छा काम कर रहे हैं। हमेशा हमें 26 करोड़ टन फसल उगाकर देते हैं। कई बार मानसून फेल हो जाता है, तब भी।
3- आप 85 के हो गए। अब भी इतना काम?
मैं नहीं जानता ये सब कैसे कर पाता हूं। मेरा मिशन है। अगले पांच सालों में ‘इंडिया-2020’ को पूरा करना। देश को विकसित बनाना है। इस देश के युवा मेरे पावर हाउस हैं। मुझे उन्हीं इग्नाइटेड माइंड्स से ताकत मिलती है। मैं हर महीने एक लाख बच्चों से मिलता हूं। अब तक लगभग 2 करोड़ युवाओं से मिल चुका हूं। मैं उनसे सीखता हूं, उन्हें सिखाता भी हूं। मेरा यह कार्यक्रम लगातार जारी है।

4-लेकिन सिर्फ बच्चों से ही क्यों?
क्योंकि वही मुझसे पूछते हैं कि हम क्या कांट्रीब्यूट कर सकते हैं? मैं उन्हें कहता हूं एक स्टूडेंट की तरह आप अच्छी तरह पढ़ाई कर अपना कांट्रीब्यूशन दे सकते हैं। अगर अच्छे से पढ़ोगे तभी एक ग्रेट इंजीनियर बनोगे, ग्रेट डॉक्टर बनोगे, पायलट, एस्ट्रोनॉट या टीचर बनोगे। लेकिन जो भी काम करें उसमें बेस्ट दें और ग्रेट बनें। लोग कह सकते हैं कि सभी तो नेगेटिव ही पसंद करते हैं। लेकिन अगर आप भी यही सोचते रहे तो आपका कांट्रीब्यूशन कुछ नहीं होगा। आप बच्चों को पॉजिटिव पसंद करना सिखाएं।

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