हटाए जा सकते हैं सात एचओडी

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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी कार्यपरिषद की बैठक गुरुवार को हाेगी। इसमें सात एचओडी को हटाने पर फैसला हो सकता है। इनमें से लाइफ साइंस विभाग के डॉ. सुरेश चांद और आईआईपीएस के डॉ. आनंद सप्रे पर कई गंभीर आरोप हैं। कार्यपरिषद ने पिछली बैठक में ही इस पर नाराजगी जताते हुए उन्हें हटाने की चेतावनी दी थी। इसके अलावा स्कूल ऑफ लॉ की हेड रहीं डॉ. अर्चना रांका पर भी निर्णय लिया जा सकता है। डॉ. रांका को फेल छात्रों को पास करने के मामले में हटाया गया था।
इधर, तक्षशिला परिसर के पांच विभागों के हेड तीन साल से ज्यादा समय से इस पद पर हैं। यूनिवर्सिटी अधिनियम 1973 की धारा 23 के तहत किसी भी एचओडी को तीन साल में हटाना जरूरी है। सामान्य तौर पर उसकी जगह वरिष्ठता में दूसरे नंबर के प्रोफेसर को नियुक्त किया है। अब प्रोफेसरों का भारी दबाव है कि इस संबंध में फैसला लिया जाए। राजभवन और यूनिवर्सिटी कार्यपरिषद भी कह चुकी है कि किसी भी एचओडी को तीन साल से ज्यादा इस पद पर नहीं रहना चाहिए।
इन्हें हो गया तीन साल से ज्यादा समय
डॉ. गणेश कांवड़िया (इकोनॉमिक्स), डॉ. अनिल कुमार (बॉयोटेक्नोलॉजी), डॉ. एस.पी. सिंह (एनर्जी), डॉ. राजेश शर्मा (फॉर्मेसी), डॉ. संजीव टोकेकर (आईईटी)।
फिजिकल एजुकेशन डायरेक्टर का पद भी खाली
यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में खेल गतिविधियों के लिए प्रमुख माने जाने वाला फिजिकल एजुकेशन डायरेक्टर का पद भी खाली है। इस पर नियुक्ति लंबे समय से टल रही है। योग्य प्रोफेसरों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सवाल पूछेंगे ताकि पता चले यूनिवर्सिटी कितनी गंभीर
कार्यपरिषद की बैठक में तीन एचओडी के अलावा कार्यकाल पूरा कर चुके विभागाध्यक्षों को लेकर भी सवाल पूछे जाएंगे। इसमें स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों के मामले में यूनिवर्सिटी कितनी गंभीर है। – डॉ. विक्रांत भूरिया, सदस्य कार्यपरिषद

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