सालभर में यूनिवर्सिटी के 55 रिजल्ट पर उठे सवाल

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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की सारी परीक्षाएं हो चुकी हैं और रिजल्ट भी आ चुके हैं। अब नया सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में न केवल रिजल्ट की भारी लेटलतीफी के लिए बल्कि गलत और गैरजिम्मेदाराना मूल्यांकन के लिए यूनिवर्सिटी पूरी तरह सवालों के घेरे में है। हालत यह हो गई है कि हर तीसरे रिजल्ट पर सवाल उठ रहे हैं। रिव्यू प्रक्रिया के दौरान यूनिवर्सिटी के दावे फेल और छात्रों के सही साबित हो रहे हैं।
45 से 75 फीसदी अंक लाने वाले विद्यार्थियों को भी एक विषय में एक से चार अंकों से रोका जा रहा है। स्थिति यह है कि बीकॉम, बीए और बीएससी जैसे परंपरागत कोर्स की कॉपियां जांचने में भी भारी लापरवाही की जा रही है। इससे 100 से ज्यादा मूल्यांकनकर्ता सवालों के घेरे में हैं, लेकिन महज तीन मूल्यांकनकर्ताओं को ब्लैक लिस्टेड किया गया है।
यही रिजल्ट क्यों बिगड़ते हैं
बीबीए, बीपीटी, बीडीएस, बीएससी, एमए(अंग्रेजी),बीए एलएलबी औैर बीएएमएस, बीएचएमएस जैसे रिजल्ट ही हर बार क्यों बिगड़ते हैं। हालांकि एमबीए, एमबीबीएस और बीकॉम के भी कुछ रिजल्ट पर सवाल उठे हैं।

रिव्यू हुआ और बदल गया रिजल्ट
पिछले दो माह के भीतर ही आए अलग-अलग परीक्षाओं के 9 रिजल्ट बिगड़े। किसी परीक्षा में 98 फीसदी छात्र फेल हो गए तो किसी में महज 20 फीसदी ही पास हो पाए। लगातार सवाल उठने के बाद यूनिवर्सिटी केवल कॉपियों की सैंपलिंग करवाई। रिव्यू हुआ और रिजल्ट बदल गया। कुछ में अभी प्रक्रिया जारी है।
रिजल्ट, जिन पर उठे सवाल
>बीबीए तीसरे सेमेस्टर के रिजल्ट पर उठे सवाल, महज 26 फीसदी हुए पास।
>एमएड के रिजल्ट पर बवाल। महज 2 फीसदी पास, 98 फीसदी छात्र फेल।
>बीकॉम पहले सेमेस्टर में 62 फीसदी छात्र फेल।
>एमए अंग्रेजी तीसरे सेमेस्टर में 30 छात्रों को एक ही विषय में दिए जीरो अंक।
>बीएससी तीसरे सेमेस्टर में 60 फीसदी फेल।
>बीएएमएस प्रथम वर्ष में 113 में से 98 छात्र फेल। 20 फीसदी भी नहीं रहा रिजल्ट।
>बीडीएस में 27 फीसदी ही पास, 60 फीसदी से ज्यादा फेल।
>बीकॉम तीसरे में दो विषय में 70 फीसदी छात्र हुए फेल।
>बीए एलएलबी थर्ड सेमेस्टर में अंग्रेजी विषय में 60 फीसदी फेल।
> 25 से ज्यादा मामलों में कई प्रश्न जांचे बिना अंक चढ़ा दिए गए हैं ।
>100 से ज्यादा मामलों में कॉपियों के प्रश्नों का टोटल ही गलत निकला।
यूनिवर्सिटी पर सवाल क्यों ?
दरअसल रिजल्ट बिगड़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने कॉपियों की सैंपलिंग भी करवाई और रिव्यू प्रक्रिया भी, लेकिन गलती पाए जाने पर भी किसी मूल्यांकनकर्ता पर कार्रवाई नहीं की। इसलिए यूनिवर्सिटी खुद सवालों के घेरे में है।
ये होना चाहिए था
>गलत मूल्यांकन पर मूल्यांकनकर्ता को सीधे ब्लैक लिस्टेड करें
>बड़ी गलती पाए जाने पर मूल्यांकनकर्ता को हर जिम्मेदारी से ब्लैक लिस्टेड करें। इसमें पेपर सेटिंग, पर्यवेक्षक,उड़नदस्ता सदस्य,ओएसडी जैसी जिम्मेदारी शामिल है।
>जिन परीक्षा में छात्रों को महज एक-दो या कुछ अंकों से फेल किया जाता है। उसका विशेष रिव्यू हो।
लगातार सुधार रहे हैं व्यवस्था
यूनिवर्सिटी मूल्यांकन व्यवस्था लगातार सुधार रही है। मूल्यांकनकर्ताओं को निर्देश जारी किया गया है कि सावधानी औैर गंभीरता के साथ मूल्यांकन करें। गलत मूल्यांकन पर मूल्यांकनकर्ताओं को ब्लैक लिस्टेड करने का भी पूरा प्रयास करेंगे। – आरडी मूसलगांवकर, कुलसचिव

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