होली को डिसिप्लिंड तरीके से मनाना चाहिए- शिक्षाविद अचल चौधरी जी

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होली एक रंगबिरंगा मस्ती भरा पर्व है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूल कर गले लगते हैं और एक दूजे को गुलाल लगाते हैं। बच्चे और युवा रंगों से खेलते हैं। आजकल अच्छी क्वॉलिटी के रंगों का प्रयोग नहीं होता और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले रंग खेले जाते हैं। यह सरासर गलत है। इस मनभावन त्योहार पर रासायनिक लेप व नशे आदि से दूर रहना चाहिए। बच्चों को भी सावधानी रखनी चाहिए। इसी के चलते कैंपस लाइव ने इंदौर शहर के कुछ खास लोगों से की बात चित| आइए जाने इस हर्षोउल्लास के पर्व पर उनका क्या कहना है——

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एन्टेर्प्रेनेउर और आर्किटेक्ट अचल चौधरी जी ने सभी को होली की खूब साडी शुभ कामनाए देते हुए कहा की भारत में कई सारे फेस्टिवल्स मनाए जाते हैं| इन फेस्टिवल्स के ज़रीये लोग एक दूसरे के संपर्क में आते हैं| इंदौर में होली ४० वर्षो से मनाई जाती है लेकिन हमे होली को एक डिसीप्लिनेड तरीके से मानना चाहिए| उन्होंने यह भी कहा की उनके हिसाब से एक दिन पानी बचाने से कुछ नहीं होगा बल्कि हमे रोज़ पानी के बचाव पर ध्यान देना चाहिए| पानी और कलर के बिना होली का त्यौहार अधूरा है| इसलिए हमे कुछ ऐसा तरीका निकालना चाहिए जिससे कोई नुकसान न हो| इसलिए लोगों को हर्बल कलर्स का उपयोग करना चाहिए और होली का त्यौहार गार्डन में मानना चाहिए जिससे की जो पानी है वो बर्बाद होने के बजे पेड़ पोधो के उपयोग में आ सके|

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एडुकेशनईस्ट डॉक्टर रमेश मंगल जी ने कहा होली रंगो का त्यौहार है , रंग बदन को एक नया प्रवेश देते हैं| मन के विचारो को एक नया प्रवेश देते हैं|मन के विचारो के इन्ही रंगो को परिवर्तित कर द्वेष राग छोड़कर होली के शानदार त्यौहार को मस्ती से मनाना चाहिए|

गायक दिलीप सोनी जी ने युवाओ को यह उत्सव जोश और प्यार से मनाने को कहा| इस दिन अपने आपको घर में बंद करने के बजाए बाहर निकलकर कर इस त्यौहार का आंनंद लेने को कहा | पानी और कलर का ध्यान तो हमे रखना ही चाहिए उसके अलावा उन्होंने जानवरो को कलर न करने की बात भी काफी ज़ोर डालकर कही क्युकी इससे उनको काफी तकलीफ पहुँचती है|

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