रामायण बेले का अद्भुद प्रदर्शन

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इंदौर. संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक अनुष्ठान अनुगूंज के दूसरे दिन दर्शकांे को फिर साहित्य और नृत्य का सुंदर संयोग देखने को मिला। बास्केटबॉल काम्प्लेक्स में सबसे पहले जबलपुर के दल देहराग ने गीत और कविताओं का गायन किया। प्रख्यात कथक नृत्यांगना शोभना नारायण की प्रस्तुति के बाद भोपाल के रंगश्री लिटिल बेले ग्रुप ने रामायण बेले पेश किया।
शोभना नारायण की प्रस्तुति की शुरुआत उनकी शिष्याओं शिवानी और मृणालिनी की शिववंदना से हुआ। पखावज की थाप, तबले की ताल के साथ शिवस्रोत के गायन और नृत्यांगनाओं के कौशल ने इस प्रस्तुति को लाजवाब बना दिया। दोनों नृत्यांगनाओं के परिधान में भी कुछ नए प्रयोग किए गए थे। इसके बाद मंच पर आईं शोभना नारायण ने मैथिलीशरण गुप्त की गौतमबुद्ध की पत्नी यशोधरा पर लिखी कविता सखि वे मुझसे कह कर जाते…. को पेश किया। सिद्धार्थ का चुपचाप चले जाना, यशोधरा का विरह और प्रतीक्षा को शोभना ने कोमल भाव भंगिमाओं के साथ पेश किया। अंत में सिद्धार्थ के आने की खबर से प्रसन्न यशोधरा उनके स्वागत की तैयारी करती है पर देखती है कि वो उसके सिद्धार्थ नहीं बल्कि भिक्षु के रूप में गौतम बुद्ध बन कर लौटे हैं और भिक्षा लेकर फिर चले जाएंगे। इस पूरे प्रसंग को शोभना नारायण ने भावपूर्ण अभिनय के साथ पेश किया।
भोपाल की प्रख्यात रंगश्री लिटिल बेले टु्र्रप के कलाकारों ने रामायण बेले का अद्भुद प्रदर्शन किया। रंगबिरंगे मुखौटे पहने कलाकारों ने सुरीले संगीत के साथ रामायण की पूरी कथा मंच पर पेश की। लोकनृत्यों का आनंद भी था और शास्त्रीय नृत्यों का कौशल भी। हालांकि देर से शुरू होने के कारण कई दर्शक इसे देख नहीं पाए।

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