बूढ़े बंदरो का शिकार करनेवाले राउते नेपाल के अंतिम खानाबदोश

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रावत समुदाय

राउते नेपाल के अंतिम खानाबदोश लोग हैं. आज बस 150 राउते ही बचे हैं. वे अच्चम के मध्य पहाड़ियों के जंगलों में रहते हैं. यहीं पर फोटोग्राफर एंड्रू न्यूवे ने उनकी तस्वीरें उतारीं. राउते लकड़ी की डालों और पत्ते तथा कपड़ों की छत से बने अस्थायी कैंपों में रहते हैं. ये कैंप सुदूर जंगल में बाहरी दुनिया की नजरों से दूर बने हुए होते हैं.

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राउते बूढ़े बंदरों के शिकार में माहिर होते हैं. वे कैंप में शिकार के साथ लौटते हैं. शिकार केवल मर्द ही करते हैं यहां औरतों के जिम्मे खाना पकाना, कपड़े धोना, पानी और जलावन की लकड़ियां लाना और अनाज तैयार करने जैसे काम हैं.

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राउते कैंप का ये नजारा बहुत आम है. पूरा परिवार एक साथ आग के चारों ओर बैठता है. मुख्यधारा में शामिल होने के नेपाल सरकार के भारी दबाव के बावजूद राउते आज भी बाहरी दुनिया की पहुंच और संपर्क से दूर एक गुप्त समुदाय के तौर पर रह रहा है. जंगल से लाई गई पत्तियां अंगीठी पर उबल रही हैं. राउतों का जंगल और खेती से गहरा जुड़ाव होता है. वे बीज बोने को पाप मानते हैं.

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