इसरो ने लॉन्च किया पहला ‘मेड इन इंडिया’ स्पेस शटल

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भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान (ISRO) सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर से पूरी तरह से भारत में बने स्पेस शटल RLV-TD को लॉन्च किया. इसे भारत का अपना खुद का स्पेस शटल बताया जा रहा है. अमेरिकी स्पेस शटल जैसा दिखने वाला ये शटल फिलहाल प्रयोग की स्थिति में है और अपने असली साइज से 6 गुना छोटा है.
विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के डायरेक्टर के सिवन ने बताया, ‘RLV-TD का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह पहुंचाना और फिर वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना है. शटल को एक ठोस रॉकेट मोटर से ले जाया जाएगा. नौ मीटर लंबे रॉकेट का वजन 11 टन है.’
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘RLV-TD के लॉन्चिंग सुबह करीब 6:30 बजे हुई. अमेरिकी स्पेस शटल की तरह दिखने वाले डबल डेल्टा पंखों वाले यान को एक स्केल मॉडल के रूप में प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर वैज्ञानिकों को इसके लिए बधाई दी. पीएम ने कहा भारत के पहले स्वदेशी अंतरिक्ष शटल RLV-टीडी की लॉन्चिंग हमारे वैज्ञानिकों के मेहनती प्रयासों का परिणाम है. गतिशीलता और समर्पण के साथ जो हमारे वैज्ञानिकों और इसरो ने पिछले कुछ सालों में काम किया है, वह असाधारण और बहुत ही प्रेरणादायक है.
ये एक रियूजेबल लॉन्च व्हीकल है. ऐसा पहली बार हो रहा है, जब इसरो एक स्पेस क्राफ्ट लॉन्च कर रहा है, जिसमें डेल्टा विंग्स होंगे. लॉन्च के बाद ये स्पेस क्राफ्ट बंगाल की खाड़ी में वापस उतर आएगा. इस स्पेस क्राफ्ट के बनने में 5 साल का समय लगा और 95 करोड़ रुपये का खर्च आया है. ये फ्लाइट इस स्पेस क्राफ्ट की हायपर सोनिक एक्सपेरिमेंट स्पीड पर री-एंट्री को झेल पाने की क्षमता का आकलन करेगी.
इसरो के साइंटिस्टों का मानना है कि वे इस स्पेस क्राफ्ट के लॉन्च और सफल होने के बाद सैटेलाइट्स आदि को स्पेस में लॉन्च करने में होने वाले खर्च को 10 गुना कम कर लिया जाएगा. इसके बाद प्रति किलोग्राम भार पर 2000 अमेरिकी डॉलर का खर्च होगा.

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