2 हजार से ज्यादा B.E छात्रों को नहीं मिला कोई कॉलेज

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पहले राउंड की बीई काउंसलिंग में हजारों छात्रों को सीटें नहीं मिल पाई हैं। 40 हजार रैंक के आसपास रहने वाले छात्रों को कोई कॉलेज अलॉट नहीं हुए। ऐसे 2 हजार से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किया था। अब कॉलेज मांग कर रहे हैं कि उनके स्तर पर एडमिशन देने का रास्ता साफ किया जाए।
प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की करीब 80 हजार सीटों में से इस बार भी हजारों सीटें खाली रह जाएंगी। जो छात्र बेहतर कॉलेज में एडमिशन लेना चाहते हैं, उन्हें मौका नहीं मिलने से अन्य कोर्सेस में डायवर्ड हो जाएंगे। यह स्थिति हर साल बन रही है। इस बार तो प्रदेश के कॉलेज यूनिवर्सिटी के दायरे में आने से टॉप 10 के बाहर रहने वाले कॉलेजों में छात्रों की डिमांड बढ़ गई हैं। वर्तमान टॉप 10 में जेईई के निचले रैंक पर छात्रों को कहीं भी एडमिशन नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे कुछ उदाहरण हैं, जिससे पता किया जा सकता है कि जो कॉलेज पिछले सालों में सीटें भरने के लिए छात्रों की तलाश करते थे, उन्हें इस बार अपने आप छात्र मिल रहे हैं। कुछ छात्रों ने ऑनलाइन काउंसलिंग में 10 से ज्यादा कॉलेजों के नाम डाले, लेकिन एक भी कॉलेज में एडमिशन लेने का नाम नहीं आया। कम्प्यूटर साइंस और आईटी जैसी ब्रांच की इतनी मारामारी है कि कॉलेजों के पास सीटें ही नहीं हैं। प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने तो कम्प्यूटर और आईटी ब्रांच में 300 से ज्यादा सीटें बढ़ा ली हैं, जबकि कॉलेजों में 60 से बढ़कर 120 सीटें हो गई हैं। कॉलेजों का कहना है कि अब इंजीनियरिंग करने वाला हर छात्र कम्प्यूटर कोर्सेस में ही एडमिशन लेना चाहता है इसलिए भी कई छात्रों को पहले राउंड में एडमिशन नहीं मिल पाया है।

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