इंदौर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में चुनौतियां ज्यादा

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प्रदेश के तीनों शहरों के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा चुनौतियां इंदौर के प्रोजेक्ट में हैं। इंदौर में पुराने इलाके में नए सिरे से विकास करना है। आप लोग जल्द से जल्द स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की डीटेल प्लानिंग तैयार कर लें। इसके बाद सिलसिलेवार ढंग से टुकड़ों-टुकड़ों में काम शुरू करें ताकि कहीं कोई समस्या नहीं आए। निगम ने जो कंसल्टेंट की टीम बनाई है, उनसे स्मार्ट सिटी का डीटेल प्लान बनवाने के बाद उसके साथ अमृत प्रोजेक्ट और हाउसिंग फॉर ऑल को मिलाकर तीनों योजनाओं का मास्टर प्लान बनाइए।
ये निर्देश शुक्रवार को भोपाल में नगरीय विकास आयुक्त विवेक अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में इंदौर के कलेक्टर पी. नरहरि, निगमायुक्त मनीषसिंह और इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट के सीईओ रोहन सक्सेना को दिए। उन्होंने कहा कि जो भी काम हो रहे हैं, उनकी गति बढ़ाई जाए। हर काम को ढंग से प्लान करें। यह भी आंकलन करें कि 2016-17 में कितनी राशि कौन से काम में खर्च होगी और वह आएगी कैसे? इसकी प्लानिंग 10-15 दिन में करके भेजें। 2017-18 के लिए भी अभी से ऐसी प्लानिंग बनाएं कि काम में कितने बजट की जरूरत होगी? आगामी दो साल के हिसाब से काम का मास्टर प्लान तैयार करो। यह काम अगले पांच-छह महीने में हो जाना चाहिए।
निगमायुक्त ने बताया कि सड़कों के विकास के साथ निगम को बिल्डिंग डेवलपमेंट, फ्लोर एरिया रेशो बढ़ाना, बिल्डिंग परमिशन और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट आदि के लिए नए हिसाब से सुविधाएं देना पड़ेंगी। इस पर अग्रवाल बोले कौन-कौनसे नियमों को बदलने की जरूरत है और क्या होना चाहिए, इसकी डीटेलिंग करके भिजवा दें। शासन बदलाव कर देगा।

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