कुश्ती की ‘सुल्तान’ बनी साक्षी

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18_08_2016-18sakshidil

साक्षी मलिक ने भारत में ओलंपिक के लिए पदक नहीं करोड़ों दिल भी जीत लिए। जब साक्षी ने अपनी हार को जीत में बदला तो देश जितना खुश था उतना ही चौंक भी गया था। पर शायद इसीलिए हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहतेे हैं और साक्षी ने भी वो बाजीगरी की कि भारत की सूखी झोली पदक से भर गई।
रक्षाबंधन पर पूरा देश इस बेटी को दुआएं और बधाई दे रहा है। साक्षी ने एक बार फिर हरियाणा का नाम रोशन कर दिया। हर ओर साक्षी ही साक्षी है। क्या नेता, क्या अभिनेता और क्या जनता सब साक्षी को बधाई दे रहे हैं और कामना कर रहेे हैं कि अगले ओलंपिक में भारत की ये बेटी सोना लाए।
कल भारत के लिए इतिहास लिखने वाली साक्षी यूं ही जीत की सुल्तान नहीं बनी। उसने पूरी बाजी को पलट कर रख दिया। हार को जीत में बदल दिया। और यही वो पल था जब साक्षी ने इतिहास रचा। हालांकि इस बार के ओलंपिक का इतिहास कुछ और ही कह रहा था। ओलंपिक में साक्षी से पहले कभी किसी भारतीय महिला पहलवान ने पदक नहीं जीता था। इस बार तो भारत की झोली बिल्कुल ही सूनी पड़ी थी।
रियो ओलंपिक में 11 दिन से भारत के खाते में कोई पदक नहीं आया था। पदक की उम्मीद जगाने वाले दिग्गज शूटर, बैडमिंटन और टेनिस स्टार हारकर बाहर हो चुके थे। भारत को सम्मोहित करने वाली दीपा कर्मकार ने भी हौसला भरपूर दिखाया था लेकिन उसके हाथ से भी पदक फिसल चुका था।
वहीं, साक्षी को भी 58 किलोग्राम भारवर्ग कुश्ती मुक़ाबले के क्वार्टर फाइनल में झटका लग चुका था। उन्हें रुस की पहलवान वलेरिया कोबलोवा ने हरा दिया था। लेकिन, फिर अचानक क़िस्मत पलटी। रूसी खिलाड़ी फाइनल में पहुंच गईं और साक्षी के सामने कांसे का तमग़ा जीतने का रास्ता खुल गया था। मंज़िल आसान नहीं थी। लेकिन यही तो सुल्तान की खासियत है कि वो गिरकर उठता है और फिर सबको चित कर देता है।

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