शिव रुद्राष्टक पर कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति

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सात दिवसीय अखिल भारतीय कालिदास समारोह की पांचवी संध्या कथक और शास्त्रीय गायन के नाम रही। शनिवार को भोपाल से आईं शास्त्रीय कथक नृत्यांगना सुश्री रासमणि द्वारा सर्वप्रथम शिव रुद्राष्टक पर आकर्षक एकल प्रस्तुति दी गई, जिसकी रचना श्री जयप्रकाश मेदी द्वारा की गई। उसके बाद उन्होंने तराना प्रस्तुत किया जिसमें विभिन्न प्रकार की थाट थी। तराना के बाद उन्होंने तीन ताल में तोडे प्रस्तुत किए, जिसमें विभिन्न प्रकार के तत्कार होते हैं।
प्रस्तुति के पहले सुश्री रासमणि रघुवंशी ने चर्चा के दौरान बताया कि कालिदास समारोह में वे पहली बार प्रस्तुति दे रही हैं। हालांकि इसके पूर्व सिंहस्थ तथा अनुगूंज कार्यक्रम में प्रस्तुति दे चुकी हैं। गौरतलब है कि सुश्री रासमणि रघुवंशी बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य के प्रति समर्पित रही हैं। उन्होंने कथक नृत्य सुप्रसिद्ध नृत्यांगना श्रीमती अमिता खरे के मार्गदर्शन में सीखा और प्रयाग संगीत समिति से कथक में स्नातक उपाधि प्राप्त की। सुश्री रासमणि ने खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह में भी शिव रुद्राष्टक नृत्य की प्रस्तुति दी है।
कथक नृत्य के पश्चात कोलकाता के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक पंडित अजय चक्रवर्ती एवं उनके दल द्वारा शास्त्रीय गायन किया गया। प्रस्तुति के पूर्व चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने शास्त्रीय संगीत और नृत्य के लिए बहुत अहम योगदान दिया है। कालिदास समारोह बहुत अद्भुत आयोजन है यह भी एक कुंभ मेले की तरह है जिसमें कोने कोने से संगीतज्ञ आकर यहां मिलते हैं और प्रस्तुति देते हैं। उल्लेखनीय है कि पंडित अजय चक्रवर्ती पूर्व में मध्य प्रदेश शासन के कुमार गंधर्व और तानसेन पुरस्कार से पुरस्कृत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत और अध्यात्म एक दूसरे के अभिन्न अंग है। शास्त्रीय संगीत अंतर आत्मा को सुकून देता है। अपनी प्रस्तुति के दौरान पंडित अजय चक्रवर्ती ने विभिन्न रागों का गायन किया, जिसका कलाप्रेमी दर्शकों ने रसास्वादन किया। तबले पर उनकी संगत संदीप घोष, हारमोनियम पर पारोमिता मुखर्जी और गायन में अनमोल चटर्जी ने की।

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