जुगाड़ असम के लखीमपुर ज़िले के भाराली अब तक 140 से ज़्यादा चीजें बना चुके हैं…!!

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उद्धब भाराली कहते हैं, “समस्याओं को सुलझाना मुझे अच्छा लगता है. मैं चाहता हूं कि लोग अपनी ज़िंदगी को अपनी कोशिशों से थोड़ा बेहतर और आत्मनिर्भर बनाएं.”असम के लखीमपुर ज़िले के भाराली इसी मंशा के साथ नई-नई खोजों में लगे हुए हैं. उन्होंने तीस साल पहले अपने परिवार के कर्ज़ को चुकाने के मकसद से यह शुरू किया था. लेकिन आज यह उनका जुनून बन चुका है.वह अब तक 140 से ज़्यादा चीजें बना चुके हैं. इनमें से कई चीज़ें व्यवसायिक तौर पर खरीदी-बेची जा रही हैं तो कई चीजों को अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड तक हासिल हो चुका है.

उनका कहना है कि उनका मुख्य मकसद लोगों की मदद करना रहा है. पूरे भारत में उन्हें उनके कृषि संबंधी नई खोजों के लिए जाना जाता है. लेकिन उनकी नई खोज से शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को मदद मिल रही है.

वो बताते हैं कि चूंकि भारत में सरकार की ओर से ऐसे लोगों को सीमित सहायता मिलती है इसलिए उनके जैसे लोगों को इसके समाधान के लिए आगे आना चाहिए.15 साल के राज रहमान जन्म से विकलांग पैदा हुए थे.भाराली ने उनके लिए एक साधारण सा उपकरण तैयार किया जो कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों वेल्क्रो और चम्मच से बना हुआ था. इसे उनके हाथ की जगह पर लगाया गया. इसकी मदद से वो खाना खाते हैं और लिख पाते हैं.भाराली ने राज के लिए खास तरह के जूते भी तैयार किए हैं जिसकी मदद से राज आसानी से घूम फिर सकते हैं.राज बताते हैं, “मैं ख़ुद को लेकर काफी परेशान रहा करता था. लेकिन अब मैं ख़ुद को तनाव मुक्त महसूस करता हूं. मुझे इस बात की फ़िक्र नहीं करनी होती है कि मैं स्कूल जाने के लिए रेलवे लाइन कैसे पार कर पाऊंगा. अब बिना किसी परेशानी के चल सकता हूं.”वो कहते हैं, “मैं खुश हूं कि मैं अपना ख़याल ख़ुद रख सकता हूं.”

 

source- BBC

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