आधार कार्ड न होने से आदिवासी को ज़मानत मिलने के बाद भी जेल से रिहाई नहीं …!

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कुछ हफ़्ते पहले का मामला होता तो इस शख़्स को ज़मानत मिलने के साथ ही रिहाई मिल जाती, लेकिन हाल ही में बनाए गए नियम के बाद ऐसा नहीं हो सका.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीते दिनों ज़मानत के बाद रिहाई के लिए आधार कार्ड को ज़रूरी बना दिया है.

अदालत ने कहा था कि राज्य में किसी भी मामले में ज़मानत मिलने पर जेल में बंद व्यक्ति और उसकी ज़मानत देने वाले शख़्स के आधार कार्ड ले लिए जाएंगे.

एक हफ़्ते के भीतर उनका सत्यापन होगा और उसके बाद ही ज़मानत पर रिहाई हो सकेगी.

छत्तीसगढ़ की जेलों में इस फ़ैसले के बाद से काफ़ी उलझन का माहौल है. कहीं अभियुक्त के पास आधार कार्ड नहीं है, तो कहीं ज़मानत देने वाले के पास.

और जिन मामलों में दोनों के आधार कार्ड हैं वहां कई स्तरों पर होने वाला सत्यापन टेढ़ी खीर बना हुआ है.

नतीजा – ज़मानत मिलने के बाद भी कई लोग जेल में ही पड़े हुए हैं.

 

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