#Modi जी कुछ तो बोलो करनी सेना हिन्दू है या राजपूत …!

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पद्मावत फ़िल्म को लेकर जारी हंगामा और सत्ता में बैठे लोगों की ख़ामोशी से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

उपद्रवी लोगों से सख़्ती से निबटने की बात तो दूर, कोई उनके उपद्रव के बारे में मुँह खोलने तक को तैयार नहीं दिख रहा, और ये सब ऐसे समय पर हो रहा है जबकि भारतीय संविधान के लागू होने का उत्सव मनाया जा रहा है.

इस उत्सव में शामिल होने आए दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष देश में सम्मानित अतिथि हैं और उन्हें अख़बारों-टीवी पर क्या दिख रहा होगा?

देश भर में अलग-अलग समय पर हुए उत्पात और उपद्रव से राज्य सरकारें किस तरह निबटती रही हैं उसमें भारी भेदभाव दिखाई देता है, करणी सेना से निबटने के मामले में तो ये कहना भी मुश्किल है कि सरकार उनसे निबट रही है.

गुड़गाँव में स्कूली बच्चों की बस पर हमले के बाद सोशल मीडिया पर काफ़ी आक्रोश दिखाई दे रहा है, उस पर राहुल गांधी ने टिप्पणी तो की है लेकिन करणी सेना के उत्पात पर उन्होंने भी मुँह नहीं खोला है.

संयोग ये है कि इन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. लेकिन इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस विरोध प्रदर्शन पर अंकुश लगाने की कोई पहल नहीं की है और ना ही इस बारे में उनका कोई बयान आया है.

हरियाणा के गुरुग्राम में हुई हिंसा की चपेट में एक स्कूली बस आने के बाद इस राज्य में भी फिल्म प्रदर्शन को सुरक्षित नहीं माना जा रहा है. हरियाणा में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.

ये सब तब हो रहा है जब सुप्रीम कोर्ट इस फ़िल्म को रिलीज करने की हरी झंडी़ दिखा चुका है. और तो और देश राष्ट्रीय गौरव का पर्व गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी में जुटा है.

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