जाने हलाकू ने उसके दादा चंगेज़ ख़ान को किस तरह फॉलो किया …!!!

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दजला नदी के दोनों किनारों पर आबाद बग़दाद, अलीफ़ लैला का शहर, ख़लीफ़ा हारून अलरशीद का शहर था.

इस बात का सही अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कितने लोग इस क़त्लेआम का शिकार हुए. इतिहासकारों का अंदाज़ा है कि दो लाख से लेकर 10 लाख लोग तलवार, तीर या भाले से मार डाले गए थे.

इतिहास की किताबों में लिखा है कि बग़दाद की गलियां लाशों से अटी पड़ी थीं. चंद दिनों के अंदर-अंदर उनसे उठने वाली सड़ांध की वजह से हलाकू ख़ान को शहर से बाहर तम्बू लगाने पर मजबूर होना पड़ा.

इसी दौरान जब विशाल महल को आग लगाई गई तो इसमें इस्तेमाल होने वाली आबनूस और चंदन की क़ीमती लकड़ी की ख़ुशबू आसपास के इलाके के वातावरण में फैली बदबू में मिल गई.

कुछ ऐसी ही दजला नदी में भी देखने को मिला. कहा जाता है कि उस नदी का मटियाला पानी कुछ दिनों तक लाल रंग में बहता रहा और फिर नीला पड़ गया.

लाल रंग की वजह वो ख़ून था जो गलियों से बह-बहकर नदी में मिलता रहा और सियाही इस वजह से कि शहर के सैंकड़ों पुस्तकालयों में महफ़ूज़ दुर्लभ नुस्खे नदी में फेंक दिए गए थे और उनकी सियाही ने घुल-घुलकर नदी के लाल रंग को हल्का कर दिया था.

फ़ारसी के बड़े शायर शेख़ सादी काफ़ी वक़्त बग़दाद में रहे थे और उन्होंने यहां के मदरसे निज़ामिया में शिक्षा हासिल की थी.

इसलिए उन्होंने बग़दाद के पतन पर यादगार नज़्म लिखी जिस का एक-एक शेर दिल को दहला देता है.

हलाकू ख़ान ने 29 जनवरी सन 1257 को बग़दाद की घेराबंदी की शुरुआत की थी.

मंगोल फ़ौज ने पिछले 13 दिन से बग़दाद को घेरे में ले रखा था. जब प्रतिरोध की तमाम उम्मीदें दम तोड़ गईं तो 10 फ़रवरी सन 1258 को समर्पण के दरवाज़े खुल गए.

37वें अब्बासी ख़लीफ़ा मुस्तआसिम बिल्लाह अपने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मुख्य दरवाज़े पर आए और हलाकू ख़ान के सामने हथियार डाल दिए.

हलाकू ने वही किया जो उसके दादा चंगेज़ ख़ान पिछली आधी सदी से करते चले आए थे.

उसने ख़लीफ़ा के अलावा तमाम आला ओहदेदारों को मौत के घाट उतार दिया और मंगोल सेना बग़दाद में दाख़िल हो गई.

इसके अगले चंद दिन तक जो हुआ उसका कुछ अंदाज़ा इतिहासकार अब्दुल्ला वस्साफ़ शिराज़ी के शब्दों से लगाया जा सकता है.

वह लिखते हैं, “वो शहर में भूखे गधों की तरह घुस गए और जिस तरह भूखे भेड़िये भेड़ों पर हमला करती हैं वैसा करने लगे. बिस्तर और तकिए चाकूओं से फाड़ दिए गए. महल की औरतें गलियों में घसीटी गईं और उनमें से हर एक तातरियों का खिलौना बनकर रह गईं.”

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