सिंगापुर के “लिटिल इंडिया” में होगी ट्रंप व् किम जोंग की मुलाकात ..!

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सिंगापुर का “लिटिल इंडिया” दो किलोमीटर के इलाक़े में बसा एक मिनी भारत है. ये विदेश में भारतीयों का अपना निवास है जहां उनकी सैकड़ों दुकाने हैं और इन दुकानों में हर वो चीज़ बिकती है जो भारत के बाज़ारों में बिकती हैं.

यहां तमिलनाडु से आए लोगों की संख्या सब से अधिक है.

तमिलनाडु से 15 साल पहले आकर बेस प्रकाश एक रेस्टोरेंट चलाते हैं. उनका कहना है कि दो किलोमीटर के दायरे में यहां 300 भरतीय रेस्टोरेंट हैं.

उनके अनुसार भारत से बाहर एक छोटी जगह पर इतनी संख्या में रेस्टोरेंट किसी और देश में नहीं मिलेंगे.

भारत के बाज़ारों की तरह यहां भी भीड़ इतनी होती है कि चलना मुश्किल हो जाता है. दोनों तरफ़ सड़कों के किनारे बसी दुकानों के नाम अक्सर तमिल में लिखे मिलेंगे.

देश की 55 लाख आबादी का वो सात प्रतिशत हैं.

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में सिंगापुर के निर्माण में चीनी और मलय मूल के लोगों के अलावा तीसरा बड़ा समुदाय तमिलनाडु से आए लोगों का था.

वो परिवार आज भी यहां आबाद हैं. तमिल भाषा सिंगापुर की सरकारी भाषाओं में से एक है. यहां के मंत्रिमंडल में तमिल समुदाय के कई मंत्री हैं जिनमें विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन प्रमुख हैं.

अब एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो तमिलनाडु से दो-तीन दशक पहले आए थे. तमिल समुदाय के अलावा भारतीय मूल में तेलुगु और पंजाबियों की संख्या सब से अधिक है.

रविवार को छुट्टी के दिन ‘लिटिल इंडिया’ दिल्ली के लाजपत नगर जैसा नज़र आता है.

शॉपिंग मॉल और दुकाने ग्राहकों से भरी होती हैं. कुछ नामी रेस्टोरेंट के बहार खाने वालों को लम्बा इंतज़ार करना पड़ता है.

सिंगापुर का ‘लिटिल इंडिया’ सिंगापुर के दूसरे समुदायों से रिश्ते बनाकर ज़रूर रखता है. उसे शायद इसी मिनी इंडिया या इसके आसपास के इलाक़ों में खाना और शॉपिंग करना अधिक पसंद है.

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