परिंदे आबाद हो गए ,निर्णय एक्ट 370 का होना था , और निर्णय एक्ट 377 का हो गया, न जाने किसका दबाव था ,

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ये देश एक हास्य के दौर से गुजर रहा है, जनता क्या आस लगा कर बैठी रहती है( सरकार से) ,और अचानक उसे क्या मिल जाता है , उसे समझ ही नही आता है l हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समलैंगिक लोगो को संव्वेधानिक दर्जा मिलने पर देश का पूरा मीडिया उसे ऐसा दिखा रहा था जैसे सभी लोग  विगत 70 वर्षो से बेड़ियों में जकडे हुए है l,

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