गुरु पूर्णिमा के साथ ही आषाढ़ मास की समाप्ति और सावन शुरू…

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सावन के महीने में ही भगवान शिव को गंगा जल से अभिषेक करना सबसे उत्तम बताया गया है। पुराणों में ये भी कहा गया है कि सावन के एक माह तक भगवान शिव कैलाश पर्वत से आकर अपनी ससुराल कनखल में निवास करते है।

ये भी माना जाता है कि भगवान विष्णु के शयन में चले जाने के बाद सावन में भगवान शिव ही ब्रह्मांड की सत्ता का संचालन कनखल में दक्ष मंदिर में रहकर करते है और इसी लिए सावन में भगवान शिव की पूजा अर्चना और गंगा जल से अभिषेक का महत्व है।

आज पूरे हर्षोल्लास के साथ लोग गुरु पूर्णिमा का पर्व मना रहे हैं। इस दिन माना जाता है कि शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं, इसलिए आज के दिन का काफी महत्व होता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन ही आज चंद्रग्रहण भी है, इसी को लेकर हरिद्वार मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने श्रद्धालुओं का तांता लगा है। आज से ही शुरू होने वाला है श्रावण मास यानी सावन का महीना। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करने से और गंगा जल से उनका अभिषेक करने से शिव अपने भक्तों पर अपार कृपा बरसाते हैं।

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