Category Archives: Campus placement News

जाने मालवा के नाम के पीछे की कहानी

मालव जनजाति का उल्लेख सर्वप्रथम ई. पू. चौथी सदी में मिलता है, जब यह जाति सिकंदर से युद्ध में पराजित हुई थी। ये मालव प्रारंभ में पंजाब तथा राजपूताना क्षेत्रों के निवासी थी, लेकिन सिकंदर से पराजित होकर वे अवन्ति (वर्तमान उज्जैन) व उसके आस-पास के क्षेत्रों में बस गये । उन्होंने आकर (दशार्ण) तथा अवन्ति को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया। दशार्ण की राजधानी विदिशा थी तथा अवन्ति की राजधानी उज्जयिनी थी। कालांतर में यही दोनों प्रदेश मिलकर मालवा कहलाये। इस प्रकार एक भौगोलिक घटक के रूप में ‘मालवा’ का नाम लगभग प्रथम ईस्वी सदी में मिलता है। मालवा पर करिब 547 वर्षो तक भील राजाओ का शासन रहा,जिनमें राजा धन्ना भील प्रमुख रहे ।[1]। राजा धन्ना भील के ही एक उत्तराधिकारी ने 730 ईसा पूर्व में दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी , इस प्रकार मालवा उस समय एक शक्तिशाली साम्राज्य था [2]

मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के समय के शासक राजा गरिमध्वज भील थे , वे अपनी बहादुरी और शौर्य के लिए जाने जाते थे , चन्द्रगुप्त मौर्य के मालवा आक्रमण के दौरान उनका सामना भील राजा से हुआ , लेकिन चाणक्य की नीति के फलस्वरूप दोनों राजाओं में मित्रता हो गई [3]

source :- विक्कीपेडिया

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नींद ना आने से हैं परेशान? 10-3-2-1 की ट्रिक तुरंत करेगी काम

बहुत कम लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो बिस्तर पर जाते ही तुरंत सो जाएं. जल्दी नींद ना आने की समस्या आम है. कई लोग जल्दी सोना तो चाहते हैं पर लगातार करवट बदलते रहने के बाद भी वो आसानी से सो नहीं पाते हैं. ऐसे ही लोगों के लिए लंदन के प्रसिद्ध डॉक्टर राज करण ने एक अनोखी ट्रिक बताई है. डॉक्टर राज ने टिकटॉक पर जल्दी सोने के लिए जो ट्रिक बताई है उसे 10-3-2-1 मेथड का नाम दिया है. डॉक्टर का कहना है कि इस मेथड को अपनाने से आपका शरीर अपने आप नींद के लिए खुद को तैयार करने लगता है.’ देखें क्या है 10-3-2-1 ट्रिक.

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Pure hydrogen fuel can be produced by using alluminium with water at room tempreture

Using the aluminum-water reaction to generate hydrogen doesn’t produce any greenhouse gas emissions, and it promises to solve the transportation problem for any location with available water. Simply move the aluminum and then react it with water on-site. “Fundamentally, the aluminum becomes a mechanism for storing hydrogen — and a very effective one,” says Douglas P. Hart, professor of mechanical engineering at MIT. “Using aluminum as our source, we can ‘store’ hydrogen at a density that’s 10 times greater than if we just store it as a compressed gas.”

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जाने क्या है तालिबान , क्या है इनका मक़सद …

तालिबान का उदय कैसे हुआ
साल 1980 की दहाई में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में फौज उतारी थी, तब अमेरिका ने ही स्थानीय मुजाहिदीनों को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था. नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन तालिबान का जन्म हो गया. कहा जाता है तालाबानियों ने पाकिस्तान के मदरसों में शिक्षा ली. हालांकि पाकिस्तान कहता है कि तालिबान के उदय में उसका कोई किरदार नहीं है.

क्या है तालिबान का मकसद
अफगानिस्तान में तालिबान की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि अमेरिका के नेतृत्व में कई देशों की फौज के उतरने के बाद भी इसका खात्मा नहीं किया जा सका. तालिबान के मकसद की बात करें तो उसका एक ही मकसद है कि अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना है

टाटा भी internet की दुनिया में कदम रखने को तैयार

टाटा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इंटरनेट की दुनिया में अपनी जगह बना रही है। जैसे-जैसे डेटा का उपयोग बढ़ा है, नई कंपनियां भी बाजार में प्रवेश कर रही हैं। जहां एलन मस्क के स्टारलिंक ने बाजार में प्रवेश किया, वहीं अब टाटा ग्रुप भी बाजार में प्रवेश कर रहा है। टाटा के इस कदम से न सिर्फ स्टारलिंक बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को भी बड़ा झटका लगा है।टाटा ने हाल ही में सेमीकंडक्टर के निर्माण की घोषणा की। इस सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने और उपयोग करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कंपनी 5G लॉन्च करने पर भी काम कर रही है। ऐसी अफवाहें हैं कि टाटा समूह जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर आधारित ब्रॉडबैंड सेवा शुरू कर सकता है। संभवत: इसके लिए टाटा समूह ने टेलीसैट से संपर्क किया है। जो 2024 तक खुला रह सकता है।
फिलहाल बाजार में JIOFIBER की काफी चर्चा है। यूजर्स इसकी स्पीड और सर्विस से काफी खुश हैं। एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा की भी हाल ही में घोषणा की गई है। जो जल्द ही भारत में लॉन्च हो सकता है। ऐसे में टाटा समूह ने भी इसमें कदम रखा है। इससे एलन मस्क और जियो दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि स्टारलिंक 2022 तक 150 एमबीपीएस तक की गति प्रदान करने में सक्षम होगा। इन मुद्दों के आधार पर कहा जा सकता है कि टाटा समूह की इंटरनेट सेवा शुरू होने के बाद यूजर्स को कई लाभकारी प्लान मिल सकते हैं।

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