Category Archives: Digital

नींद ना आने से हैं परेशान? 10-3-2-1 की ट्रिक तुरंत करेगी काम

बहुत कम लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो बिस्तर पर जाते ही तुरंत सो जाएं. जल्दी नींद ना आने की समस्या आम है. कई लोग जल्दी सोना तो चाहते हैं पर लगातार करवट बदलते रहने के बाद भी वो आसानी से सो नहीं पाते हैं. ऐसे ही लोगों के लिए लंदन के प्रसिद्ध डॉक्टर राज करण ने एक अनोखी ट्रिक बताई है. डॉक्टर राज ने टिकटॉक पर जल्दी सोने के लिए जो ट्रिक बताई है उसे 10-3-2-1 मेथड का नाम दिया है. डॉक्टर का कहना है कि इस मेथड को अपनाने से आपका शरीर अपने आप नींद के लिए खुद को तैयार करने लगता है.’ देखें क्या है 10-3-2-1 ट्रिक.

    'No new videos.'

Pure hydrogen fuel can be produced by using alluminium with water at room tempreture

Using the aluminum-water reaction to generate hydrogen doesn’t produce any greenhouse gas emissions, and it promises to solve the transportation problem for any location with available water. Simply move the aluminum and then react it with water on-site. “Fundamentally, the aluminum becomes a mechanism for storing hydrogen — and a very effective one,” says Douglas P. Hart, professor of mechanical engineering at MIT. “Using aluminum as our source, we can ‘store’ hydrogen at a density that’s 10 times greater than if we just store it as a compressed gas.”

    'No new videos.'

जाने क्या है तालिबान , क्या है इनका मक़सद …

तालिबान का उदय कैसे हुआ
साल 1980 की दहाई में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में फौज उतारी थी, तब अमेरिका ने ही स्थानीय मुजाहिदीनों को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग के लिए उकसाया था. नतीजन, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन तालिबान का जन्म हो गया. कहा जाता है तालाबानियों ने पाकिस्तान के मदरसों में शिक्षा ली. हालांकि पाकिस्तान कहता है कि तालिबान के उदय में उसका कोई किरदार नहीं है.

क्या है तालिबान का मकसद
अफगानिस्तान में तालिबान की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि अमेरिका के नेतृत्व में कई देशों की फौज के उतरने के बाद भी इसका खात्मा नहीं किया जा सका. तालिबान के मकसद की बात करें तो उसका एक ही मकसद है कि अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना है

टाटा भी internet की दुनिया में कदम रखने को तैयार

टाटा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा इंटरनेट की दुनिया में अपनी जगह बना रही है। जैसे-जैसे डेटा का उपयोग बढ़ा है, नई कंपनियां भी बाजार में प्रवेश कर रही हैं। जहां एलन मस्क के स्टारलिंक ने बाजार में प्रवेश किया, वहीं अब टाटा ग्रुप भी बाजार में प्रवेश कर रहा है। टाटा के इस कदम से न सिर्फ स्टारलिंक बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को भी बड़ा झटका लगा है।टाटा ने हाल ही में सेमीकंडक्टर के निर्माण की घोषणा की। इस सेमीकंडक्टर का उपयोग मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने और उपयोग करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा कंपनी 5G लॉन्च करने पर भी काम कर रही है। ऐसी अफवाहें हैं कि टाटा समूह जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर आधारित ब्रॉडबैंड सेवा शुरू कर सकता है। संभवत: इसके लिए टाटा समूह ने टेलीसैट से संपर्क किया है। जो 2024 तक खुला रह सकता है।
फिलहाल बाजार में JIOFIBER की काफी चर्चा है। यूजर्स इसकी स्पीड और सर्विस से काफी खुश हैं। एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा की भी हाल ही में घोषणा की गई है। जो जल्द ही भारत में लॉन्च हो सकता है। ऐसे में टाटा समूह ने भी इसमें कदम रखा है। इससे एलन मस्क और जियो दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि स्टारलिंक 2022 तक 150 एमबीपीएस तक की गति प्रदान करने में सक्षम होगा। इन मुद्दों के आधार पर कहा जा सकता है कि टाटा समूह की इंटरनेट सेवा शुरू होने के बाद यूजर्स को कई लाभकारी प्लान मिल सकते हैं।

24 घंटे में 203 किलोमीटर दौड़े इंदौरी कार्तिक

7 अगस्त शाम 6 से, 8 अगस्त शाम 6 बजे, कुल 24 घंटे 400 मीटर के 507 लेप्स करीब 203 किलोमीटर की सतत दौड़4600 किलोमीटर इंदौर से बेंगलुरु यशवंतपुर (कर्नाटक) की थका देने वाली लम्बी यात्रा । निढ़ाल कर देने वाली गर्मी, पल पल दौड़ में बाधा बन रही थी कई नामचीन धावक गर्मी के सामने हार मान दौड़ से बहार हो चुके थे । उस बीच हल्की सी बारिश ने आग में घी का काम किया स्पर्धा चरम सीमा में थी मजे हुवे धावक हार मानने को तैयार नही थे सिर और बदन पर पानी डाल सतत दोड़ रहे थे कुछ फिजियो की मदद से शरीर की टूट फुट को मरहमपट्टी करवा रहे थे,तो कुछ डायट प्लान चेंज कर गर्मी से निजात पाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे । ऐसे में सदी हुई गति नमक का उपयोग कर अपने को क्रैम्प से बचाते हुवे 200 किलोमीटर का टारगेट सेट कर घड़ी से बात करते हुवे । अपनी गाड़ी को दूसरे गैर में ही चलाना उंचीत समझा ओर सतत दौड़ जारी थी । परंतु जूते में कैद पैर मोम की तरह पिघल रहे थे । तलवे छील से गए नाखून काले पड़ गए छाले फुट कर घाव बन गए यहाँ हिम्मत हारना मतलब दौड़ से बहार डिस्टेंस 220 का था पर पैर में असहयनी दर्द के बावजूद अंततः 24 घंटे का सफर तय कर ही लिया हम इंदौरी कहा रुकने,थमने वाले विजय बिगुल बजते ही ये कदम थमे ओर सूर्य देव को प्रणाम कर अगले मिसन इस से भी ज्यादा गर्मी में एक रेकार्ड खंडित करने के प्लान को लिए इंदौर की ओर कुच कर गए ,ये कदम जल्द ही मुलाकात होगी एक खतरनाक मिसन पर विजय पाने की वैसे 24 घंटे स्टेडियम रन का यह मेरा पहला अनुभव था 12 घंटे स्टेडियम रन में तो बहुत झंडे गाड़े है । ऐसी जानकारी भी लगी कि 24 घंटे में 200 किलोमीटर करने वाले अब तक इंडिया में शायद 10 से 15 ही है अपुन अपने पहले अनुभव और सब से कम उम्र में 24 घंटे में 203 करने वाले सब से युवा धावक भी बने तो भैया जी आशीष बनाए रखना आप का यही आशीष हर दौड़ में मेरा रक्षा कवच बन काम करता है