Category Archives: Lifestyle

खूबसूरत चेहरे के साथ कॉफी से बना ये फेसपैक आपके लिए परफेक्ट

बेदाग और निखरी त्वचा भला किसकी चाहत नहीं होती। लेकिन बिना मेहनत किए आपको खूबसूरत बेदाग स्किन मिलना काफी मुश्किल है। खूबसूरत और बेदाग स्किन के लिए न सिर्फ हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी खानपान की जरूरत है बल्कि स्किन की सही देखभाल भी बहुत ही जरूरी है। हालांकि मार्केट में कई तरह के प्रोडक्ट्स मिल जाते हैं जो स्किन को चमकदार बनाने के साथ-साथ दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाते हैं लेकिन इनके अंदर के कैमिकम आगे जाकर नुकसानदेय होते हैं।

अगर आप नैचुरल तरीके से खूबसूरत चेहरे के साथ स्किन संबंधी हर समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कॉफी से बना ये फेसपैक आपके लिए परफेक्ट है। जानिए इसे घर में कैसे बनाकर आप खूबसूरत चेहरा पा सकते हैं।  

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ग़ुलाम हैदर: जिन्होंने लता, नूरजहां और शमशाद बेगम जैसी आवाज़ें फ़िल्मी दुनिया को दीं

फ़िल्म संगीत में मास्टर ग़ुलाम हैदर का वही स्थान है, जो फिज़िक्स में अल्बर्ट आइंस्टाइन और सर आइज़ैक न्यूटन का है. उन्होंने 90 साल पहले फ़िल्म संगीत के डीएनए का आविष्कार किया था. लगभग एक सदी बाद आज भी, रचना के मामले में फ़िल्म का प्लेबैक म्यूज़िक उसी अंदाज़ का है.

मास्टर जी को ये सम्मान हासिल है कि उन्होंने उपमहाद्वीप के संगीत को मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहां और लता मंगेशकर जैसी सुरीली आवाज़ों का तोहफ़ा दिया. इतना ही नहीं बल्कि मास्टर ग़ुलाम हैदर ने ही 12 साल की उम्र में लोगों से शमशाद बेगम का परिचय कराया, जो बाद में अविभाजित भारत की पहली प्रसिद्ध फ़िल्म गायिका बनीं.

चूंकि शमशाद बेगम इस क्षेत्र की पहली प्लेबैक सिंगर थीं, इसलिए ही नूरजहां और लता मंगेशकर सहित उनके बाद आने वाली गायिकाओं ने शमशाद बेगम की शैली का उपयोग करते हुए गायकी के अपने अनोखे अंदाज़ की बुनियाद रखी.

मास्टर ग़ुलाम हैदर ने ही 74 साल पहले लता मंगेशकर की क्षमताओं को पहचाना था, जब वो कमर्शियल बाजार में एक ‘कोरस गर्ल’ थीं. बीबीसी उर्दू से बात करते हुए लता मंगेशकर को ये बातें बिलकुल ऐसे याद थी, जैसे कल की ही बात हो.

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सर्दियों में जरूर खाएं अरबी, मोटापा कंट्रोल करने समेत कई हैं फायदे

जड़ वाली सब्जियों में अरबी को सबसे स्वादिष्ट और सेहतमंद माना जाता है. भारत और एशिया में इसे सबसे ज्यादा खाया जाता है. इसकी दो किस्में होती हैं एक काली अरबी एक ऐसी सब्जी है जो सर्दियों के मौसम में बड़े चाव से खाई जाती है. जड़ वाली सब्जियों में अरबी को सबसे स्वादिष्ट और सेहतमंद माना जाता है. भारत और एशिया में इसे सबसे ज्यादा खाया जाता है. इसकी दो किस्में होती हैं एक काली जबकि दूसरी हरे तने वाली होती है.

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कोरियन ड्रामा की दुनिया में बढ़ती लत :स्क्विड गेम

स्क्विड गेम का मशहूर होना, पश्चिमी देशों में हाल के सालों में आई ‘कोरियन सभ्यता की सूनामी’ का एक हिस्सा है. के-पॉप के आर्टिस्ट बीटीएस और ब्लैकपिन्क म्यूज़िक जगत में बड़ा नाम बन गए हैं. फ़िल्मों की बात करें तो पैरासाइट और मिनारी को हॉलीवुड की फ़िल्मों जैसी पहचान के साथ ऑस्कर सम्मान भी मिले. स्क्विड गेम इसी ट्रेंड की अगली कड़ी है.

ऐसा लगता है कि इस के-ड्रामा को रातों-रात सफलता मिल गई है, लेकिन ऐसा नहीं है. दुनियाभर के दर्शकों पर इनका जादू अभी चला है, लेकिन के-ड्रामा एशिया में दशकों के प्रचलित रहे हैं.

90 के दशक में बाज़ार के खुलने के साथ ही इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहुत पैसे आने शुरू हुए. जापान गिरती अर्थव्यवस्था से लड़ने लगा तो चीन की अर्थव्यवस्था बढ़ने लगी. दक्षिण कोरिया की सभ्यता को भी पहचान मिलनी शुरू हुई. अमेरिकी प्रोग्राम की तुलना में दर्शक के-ड्रामा से अधिक जुड़ा हुआ महसूस करने लगे, ये चीनी संस्कृति और सभ्यता के भी अधिक क़रीब थे.

अगले एक दशक में इन्होंने जापानी वर्चस्व को भी चुनौती दी. साल 2003 में कोरियन ड्रामा विंटर सोनाटा को जापान के 20 प्रतिशत दर्शकों ने देखा. कोरियन कल्चर एंड इंफ़ॉरमेशन सर्विस की 2011 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “कई एशियाई देशों में कोरियन ड्रामा वहां के रहन-सहन और ख़रीदारी पर प्रभाव डाल रहा है जो कि सभ्यता की अपील के बारे में बताता है.”

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विजया दशमी में शस्त्र पूजन का महत्व

शस्त्र निष्क्रिय होते हुए भी सक्रिय होता है… मतलब अगर वो कहीं किसी आलमारी में पड़ा पड़ा जंग खा रहा हो तो भी अपना काम करता रहता है उसकी मौजूदगी ही शत्रुओं के बुरे और कुत्सित विचारों को नष्ट करने के लिए काफी होती है ।

-दुनिया में अशांति इसलिए है क्योंकि सज्जनों ने शस्त्रों का त्याग कर दिया है और दुर्जन सदैव की तरह शस्त्रों से लैस हैं यही वजह है कि दुर्जन हावी हैं और धरती पर अनाचार फैलता जा रहा है

-दुनिया को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है एक जिनके पास शस्त्र होता है और दूसरा जिनके पास शस्त्र नहीं होता है… जिनके पास शस्त्र होता है वो सदैव निडर और वीर बने रहते हैं और जिनके पास शस्त्र नहीं होते हैं और वो सदैव भयभीत होते हैं और कायर पुरुष बने रहते हैं

-जिस घर में अस्त्र शस्त्र होते हैं उस घर की स्त्रियों पर कभी किसी की कुदृष्टि डालने की हिम्मत भी नहीं होती है और जिनके घर में अस्त्र शस्त्र नहीं होते हैं उनकी स्त्रियों के साथ राह चलते छेड़खानी होती है लव जिहाद जैसी घटनाएं होती हैं और वो सदैव थाने के चक्कर ही लगाते रह जाते हैं… उन्हें बदनामी के सिवाय कभी कुछ हासिल नहीं होता है।

-सत्यमेव जयते… यानी सत्य की ही विजय होती है इस तरह की सूक्तियों के भरोसे बैठने से कोई फायदा नहीं है… सत्य तो हिंदुओं के साथ ही है फिर उनका पलायन क्यों हो रहा है ? सत्य तो युद्धिष्ठिर के साथ था लेकिन फिर भी वन वन भटकते रहे… जब युद्धिष्ठिर ने शस्त्र उठाया तभी सत्यमेव जयते हुआ । इसीलिए अब कहावतें बदल गई हैं… ये कलियुग है और कलियुग में सदैव शस्त्र मेव जयते होता है… यानी जिसके पास शस्त्र होगा उसी की विजय होगी । इसलिए शस्त्र की खरीद करो… अपने पास सदैव शस्त्र रखो ।

-ज्योतिष के हिसाब से भी ध्यान दें… शस्त्र का मतलब है… मंगल ग्रह… अगर आपके पास शस्त्र है तो आपका मंगल मजबूत है और अगर आपका मंगल मजबूत है तो आप शत्रुओं पर सदैव विजय प्राप्त करते रहेंगे… इसलिए अपनी भुजाओं को शस्त्रों से मजबूत करें ।

  • एक बार अपने हाथ में शस्त्र लेकर देखो… तब आपको ये महसूस होगा कि देशद्रोही शत्रु चींटियों के समान हैं। शस्त्र का होना ही आत्मविश्वास वर्धक महान मानसिक औषधि है इसका नित्य सेवन करते रहो ।
  • राष्ट्र के शत्रुओं की संख्या गिनकर चिंता में मत पड़ो… चिंता सदैव इस बात की करो कि तुम्हारे पास कितने अस्त्र शस्त्र है… सदैव सुनिश्चित करो कि तुम्हारे अस्त्र शस्त्रों की संख्या तुम्हारे शत्रुओं की संख्या से ज्यादा हो
  • जैसा को तैसा जवाब देना सीखो… शिकायत मत करो… शिकायत लेकर किसके पास जा रहे हो… ये संविधान… कानून… प्रशासन और व्यवस्था सिर्फ उनके लिए है जो शक्तिशाली हैं । कायर लोगों का साथ तो भगवान भी नहीं देता.. कायर लोग सिर्फ शिकायत करते रह जाते हैं… इतने दिनों में आपको ये अवश्य महसूस हुआ होगा कि प्रशासन भी सदैव अत्याचार करने वाले शक्तिशालियों का साथ ही देता है
  • अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी खुद लो… कोई सेना… कोई सरकार तुमको बचाने नहीं आएगी… जब तुम पर संकट आएगा तो उस वक्त तुम और सिर्फ तुमको ही उसका सामना करना होगा… तुम्हारे सिवाय कोई तुम्हारी प्राण रक्षा नहीं कर सकेगा ।
  • इसीलिए नियमानुसार शस्त्रों का संचय करो… सदैव पराक्रमी बनो… सज्जन बनो लेकिन कायर नहीं… शस्त्र धारण करके सज्जन बनो तभी तुम्हारी सज्जनता सुशोभित होगी ।
  • इस सूक्ति का नित्य पठन करते रहें “कोई सिंह को, वन के राजा के रूप में अभिषेक या संस्कार नहीं करता है अपने पराक्रम के बल पर सिंह स्वयं जंगल का राजा बन जाता है”

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