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इस वर्ष संपत्ति गाइड लाइन की दरो में कोई वृद्धि नहीं -सीएम शिवराज सिंह

मध्यप्रदेश शासन ने आमजनो को राहत देने के उद्देश्य से इस वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन की दरों में वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है। इस वर्ष मौजूदा गाइडलाइन से ही संपत्ति की खरीद और ब्रिक्री होगी। साथ ही 5,000 ऐसे स्थान जहां दरें निधारित नहीं थीं वहां दरें निर्धारित की जाएंगी:

कंज़र्वेटरशिप ने मेरे सपनों को मार दिया है-ब्रिटनी स्पीयर्स

साल 2008 में ब्रिटनी मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी से जूझ रही थीं, उस दौरान कोर्ट ने कंज़र्वेटरशिप नाम की एक प्रक्रिया के तहत उनकी देखरेख के लिए कंज़र्वेटर यानी क़ानूनी अभिभावक नियुक्त किए थे.

कोर्ट ने अपने आदेश में ब्रिटनी की संपत्ति और उनकी ज़िंदगी के अहम फ़ैसले लेने का हक़ उनके पिता जेमी स्पीयर्स को दिया था. लेकिन बाद में ब्रिटनी ने अपने पिता को इस भूमिका से बाहर करने की गुज़ारिश की.

ब्रिटनी स्पीयर्स ने कहा कि जब तक उनके पिता का कंट्रोल उनते करियर पर रहेगा, वो परफॉर्म नहीं करेंगी. साल 2008 में कंज़र्वेटरशिप के तहत ब्रिटनी के पिता ये अधिकार मिला हुआ है.

ब्रिटनी ने सार्वजनिक तौर पर किए गए कई कमेंट्स में उनपर किए जा रहे कंट्रोल और अपनी आर्थिक स्थिति को बयां किया. इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इस कंज़र्वेटरशिप ने मेरे सपनों को मार दिया है… अब मेरे पास कुछ बचा है तो है उम्मीद.”

ब्रिटनी ने समझौते को अपमानजनक बताया है और वो इसे ख़त्म करना चाहती हैं. बीते कई सालों से ब्रिटनी के लीगल गार्जियन (क़ानूनी तौर पर उनके अभिभावक) उनके करियर के फ़ैसले ले रहे हैं.

ब्रिटनी ने लिखा, “मैं आने वाले दिनों स्टेज पर परफॉर्म नहीं करूंगी, जब मेरे पिता ये फ़ैसला करें कि मुझे क्या पहनना है, बोलना है, करना है या सोचना है.”

“वेगस पर स्टेज पर जाने से बेहतर है मैं अपने कमरे से वीडियो शेयर करूं. मैं मेकअप लगा कर बार बार स्टेज पर कोशिश नहीं करूंगी.”

    'No new videos.'

कैसे काम करता है सॉफ्टवेयर पेगासस

ये एक सर्विलांस सॉफ्टवेयर है जिसे इसराइल की सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने बनाया है. इसके जरिए किसी व्यक्ति का फोन हैक करके उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है.

इसे टारगेट के फोन में इंस्टॉल किया जाता है और फिर उसके फोन का रीमोट कंट्रोल ले लिया जाता है. ये रिमोट एक्सेस ट्रोजन की तरह काम करता है.

यरूशलम स्थित द इंस्टीट्यूट फ़ॉर नेशनल सिक्यूरिटी स्टडीज़ से जुड़े साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कर्नल गाबी सिबोनी के मुताबिक, “ये कैसे काम करता है इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. ये एक बेहद उन्नत सॉफ्टवेयर है जिसे एनएसओ ने डेवलप किया है.”

इसे बनाने वाली कंपनी एनएसओ का गठन 2009 में हुआ था और ये अति उन्नत निगरानी टूल बनाती है. दुनिया के कई देशों की सरकारें इसकी ग्राहक हैं.

पेगासस-जासूसी मामले में जो कथित नई लिस्ट जारी की गई है उसमें उस महिला के इस्तेमाल किये गए तीन फ़ोन नंबर भी हैं जिसने अप्रैल 2019 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक समिति ने गोगोई को क्लीन-चिट दे दी थी और उनके रिटायर होने के तुरंत बाद सरकार ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया था.

द वायर के अनुसार, इस महिला के नंबरों के साथ-साथ उनके पति और उनके दो भाइयों द्वारा इस्तेमाल किए गए आठ अन्य नंबरों को निगरानी के लिए चुना गया. द वायर के अनुसार, ये वह समय था जब पूर्व सीजेआई के ख़िलाफ़ उन्होंने आरोप लगाए थे.

इंग्लैंड के काले खिलाड़ी जब यूरो कप के फ़ाइनल में गोल नहीं कर पाए तो मिली गालियाँ

वर्ष 1966 में विश्व कप जीतने के बाद पहली बार इंग्लैंड की टीम किसी बड़ी प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पहुँची थी ,लंदन के मशहूर वेम्बली स्टेडियम में क़रीब 60 हज़ार दर्शकों के सामने हार के बाद इंग्लैंड के खिलाड़ी काफ़ी मायूस, निराश और हताश दिखे. कई खिलाड़ी तो इतने भावुक थे कि वे अपने आंसुओं पर नियंत्रण नहीं रख पाए. ख़ासकर उस स्थिति में जब इंग्लैंड की टीम ने दो मिनट के अंदर ही गोल करके इटली पर बढ़त ले ली थी.

फ़ाइनल मैच का फ़ैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, क्योंकि अतिरिक्त समय के बाद भी स्कोर 1-1 से बराबर था. पेनल्टी शूट आउट में इंग्लैंड की टीम पाँच में से दो ही गोल मार पाई, जबकि इटली ने तीन गोल दाग़कर ख़िताब अपने नाम कर लिया.

इंग्लैंड की हार और इटली की जीत के अलावा ये फ़ाइनल मैच फ़ुटबॉल प्रशंसकों के हुडदंग और फिर नस्लभेदी टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहा. मैच शुरू होने से पहले वेम्बली स्टेडियम के बाहर जुटे सैकड़ों की संख्या में लोगों ने ख़ूब हंगामा किया, मारपीट की और कई तो बिना टिकट के अंदर घुस गए.

आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस से होने वाले बदलाव आग, बिजली या इंटरनेट से भी ज़्यादा प्रभावी-गूगल सीईओ सुंदर पिचाई

Sunder pichai CEO Google

दो चीज़ों से आएगी क्रांति

पिचाई के अनुसार, अगले 25 सालों में दो चीज़ें क्रांति लेकर आएँगी, वो हैं, आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस और क्वॉन्टम कंप्यूटिंग. आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं इसे मानवता की बनाई जाने वाली सबसे बेहतरीन तकनीक के रूप में देखता हूँ.”

“आप आग, बिजली या इंटरनेट के बारे में अभी जैसा सोचते हैं, ये वैसा ही होने वाला है. मुझे लगता है उनसे भी बेहतर”

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम मनुष्यों की तरह काम काम करने के लिए बनाया जाता है, ख़ासतौर पर किसी विशेष प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए. अभी भी कई ऐसे सिस्टम काम कर रहे हैं.

कई देश सूचना के प्रवाह को रोक रहे हैं और स्वतंत्रता के मॉडल को अक्सर हल्के में लिया जाता है.बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने प्राइवेसी, डेटा और टैक्स से जुड़े विवादों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस से होने वाले बदलाव आग, बिजली या इंटरनेट से भी ज़्यादा प्रभावी होंगे.

पिचाई से जब पूछा गया कि इंटरनेट का चीनी मॉडल – जिसमें सरकार के हाथ में बहुत ताक़त है और कड़ी निगरानी रखी जाती है, कितना सही है, तो पिचाई ने बिना चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्र और मुक्त इंटरनेट पर “हमला किया जा रहा है.” हालांकि उन्होंने इसके बाद कहा, “हमारे प्रमुख उत्पादों और सेवाओं में से कुछ भी चीन में उपलब्ध नहीं हैं.”

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