देवरानी-जेठानी ने एक साथ पास की UPPSC परीक्षा, एक को मिला DSP का पद दूसरी बनीं प्रिंसिपल

UPPSC की परीक्षा देश के सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। वही बात इसमें चयनित होने वाले नामों की करें तो यह परीक्षा पास करने वाले लोग अक्सर इतिहास रचते हैं। आज हम बात कर रहे हैं बलिया जिले में रहने वाली एक देवरानी-जेठानी की जोड़ी की, जिन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 2018 की परीक्षा पास की थी|

जेठानी शालिनी श्रीवास्तव ने इस परीक्षा को पास कर के प्रधानाचार्य का पद हासिल किया था, तो वहीं उनकी देवरानी नमिता शरण इस परीक्षा को पास कर पुलिस उपाधीक्षक के पद पर चयनित हुई थी।वर्तमान में शालिनी वाराणसी के रामनगर क्षेत्र राधा किशोरी राजकीय बाल विद्यालय इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात है। इसके पहले बलिया के सहतवार क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रजौली में अध्यापक के पद पर कार्यरत थी। मालूम हो कि शालिनी और नमिता बलिया के सिकंदरपुर क्षेत्र के बनहरा निवासी डॉ ओम प्रकाश सिन्हा की बहूएं है।

बता दें ओमप्रकाश के बड़े बेटे डॉ सौरभ कुमार उदयपुर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर है। सौरभ की शादी शालिनी से साल 2011 में हुई थी। उस समय शालिनी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक पद पर कार्यरत थी। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी की और यूपीएससी की परीक्षा पास कर यह मुकाम हासिल किया।

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आइडेंटिफ़िकेशन बिल-2022 का क्यों हो रहा है विरोध?

सोमवार को लोकसभा में क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफ़िकेशन) बिल, 2022 रखा गया. बिल को केंद्रीय गृह राज्य मंत्रीअजय मिश्र  ने पेश किया. बिल के समर्थन में अजय मिश्रा ने कई बातें रखीं. उन्होंने कहा कि अपराधियों पर नकेल कसने, दोष सिद्ध करने और जांच एजेंसियों के हाथ मज़बूत करने के लिए ये बिल लाया जा रहा है.

इस बिल को बर्बर कहते हुए विपक्ष ने इसका ज़ोरदार विरोध किया. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि ये बिल नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है.

क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफ़िकेशन) बिल का विरोध ना सिर्फ़ राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं बल्कि इस पर समाज के अलग-अलग वर्गों से सवाल उठाए जा रहे हैं. ऐसा इस बिल में क्या है जिसे लेकर इतनी चर्चा हो रही है?

इस वक्त देश में अपराधियों की पहचान ‘बंदी शिनाख़्त अधिनियम 1920’ के तहत होती है. इस क़ानून में दोषी ठहराए गए अपराधियों के शरीर की सीमित माप की अनुमति दी गई है. इस क़ानून के तहत एक साल या उससे अधिक कारावास होने पर ही अपराधी के फ़िंगरप्रिंट और फ़ुट प्रिंट लिए जाते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को दो साल की सज़ा होती है तो इसी क़ानून के तहत उसके फ़िंगरप्रिंट और फ़ुट प्रिंट लिए जाएंगे.

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परीक्षा हमारी ज़िंदगी का छोटा-सा हिस्सा है, इससे डरने की जरूरत नहीं है -पीएम नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्कूल के विद्यार्थियों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ की. इस दौरान उन्होंने नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों और अभिभावकों से बात की.ये कार्यक्रम दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुआ. विद्यार्थियों और अभिभावकों ने वीडियो के ज़रिए भी सवाल पूछे.

पीएम मोदी ने विद्यार्थियों को परीक्षा से ना डरने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि परीक्षा हमारी ज़िंदगी का छोटा-सा हिस्सा है, जिससे हम पहले भी गुज़र चुके हैं. ये नया नहीं है.उन्होंने माता-पिता की आकांक्षाओं और उसके बच्चों पर दबाव, ऑनलाइन पढ़ाई और नई शिक्षा नीति पर भी चर्चा की.यहाँ कोई भी ऐसा विद्यार्थी नहीं बैठा है जो पहली बार परीक्षा देगा. आपके पास परीक्षा का छोटा अनुभव नहीं है. हम समय-समय पर परीक्षा देते-देते एग्ज़ाम प्रूफ (परीक्षा से सुरक्षित) हो गए है. परीक्षा हमारी ज़िंदगी में आगे बढ़ने का आधार हैं.जितनी सहज दिनचर्या सामान्य दिनों में होती है उतनी ही परीक्षा में रखें. बहुत अधिक जोड़ना-घटाना आपको परेशान करेगा. ये ना सोचें कि दोस्त कोई काम कर रहा है, तो आप भी वो कर लें.- मैं चाहता हूँ कि बच्चे परीक्षा के दौरान घबराहट भरे माहौल से दूर रहें. आपको अपने दोस्तों की नकल करने की ज़रूरत नहीं है. आप जो करना चाहते हैं, उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ करें और मुझे भरोसा है कि आप त्योहार की तरह परीक्षा दे पाएँगे.

– पीएम मोदी ने इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई पर भी बात की. उनसे ऑनलाइन क्लास के दौरान सोशल मीडिया पर भटकाव को लेकर सवाल पूछा गया था. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ही नहीं ऑफ़लाइन क्लास में भी ध्यान भटक जाता है. इसलिए समस्या माध्यम नहीं बल्कि मन है.

– हमें ऑनलाइन पढ़ाई को रिवॉर्ड की तरह लेना चाहिए. ऑनलाइन पाने के लिए है और ऑफ़लाइन पनपने के लिए है. ऑनलाइन को अपना आधार मज़बूत करने के लिए उपयोग करें. अगर ऑनलाइन में दिमाग़ भटकता है तो उसके लिए भी टूल मौजूद हैं.

– उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी चर्चा की. पीएम मोदी ने बताया कि देशभर से आए क़रीब 20 लाख इनपुट पर विचार करके पूरी सूझबूझ से यह नीति तैयार की गई है. इस नीति को सरकार ने नहीं, देश के नागरिकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों ने मिलकर देश के भविष्य के लिए बनाया है.

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सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी। उन्होंने कहा कि हमने फरवरी में ही जनता से वादा किया था कि यदि दोबारा हमारी सरकार बनी तो हम राज्य में यूसीसी लेकर आएंगे। धामी ने कहा कि हम अन्य राज्यों से भी अपेक्षा करेंगे कि वे भी अपने यहां यूसीसी लागू करें। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड जीत दिलवाने वाले धामी खुद अपना चुनाव हार गए थे, फिर भी पार्टी नेतृत्व ने उनके ऊपर भरोसा जताया और राज्य की कमान एक बार फिर उनके हाथ में दी।

धामी ने ऐलान किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी।

आज मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया है: पुष्कर सिंह धामी

धामी ने कहा कि अन्य राज्यों से भी हम अपेक्षा करेंगे कि वहां पर भी इसे लागू किया जाए।

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी। उन्होंने कहा कि हमने फरवरी में ही जनता से वादा किया था कि यदि दोबारा हमारी सरकार बनी तो हम राज्य में यूसीसी लेकर आएंगे। धामी ने कहा कि हम अन्य राज्यों से भी अपेक्षा करेंगे कि वे भी अपने यहां यूसीसी लागू करें। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड जीत दिलवाने वाले धामी खुद अपना चुनाव हार गए थे, फिर भी पार्टी नेतृत्व ने उनके ऊपर भरोसा जताया और राज्य की कमान एक बार फिर उनके हाथ में दी।

धामी ने देहरादून में कहा, ‘आज नई सरकार का गठन होने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। 12 फरवरी 2022 को हमने जनता के समक्ष संकल्प लिया था कि हमारी सरकार का गठन होने पर हम यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर आएंगे। आज हमने तय किया है कि हम इसे जल्द ही लागू करेंगे। हम एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाएंगे और वह कमेटी इस कानून का एक ड्राफ्ट तैयार करेगी और हमारी सरकार उसे लागू करेगी। आज मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया है। अन्य राज्यों से भी हम अपेक्षा करेंगे कि वहां पर भी इसे लागू किया जाए।

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हम्पी भारत के सात आश्चर्य में क्यों है जाने !

हम्पी, दक्षिणी भारत के एक पुराने शहर विजयनगर में स्थित एक छोटा सा गांव है. संस्कृत में, विजयनगर का मतलब “जीत का नगर” होता है. 1336 से 1565 तक, यह शहर विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था. … इसके बाद, 1986 में इस प्राचीन शहर को यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित कर दिया गया.

हम्पी ऐतिहासिक स्थल कर्णाटक में http://www.campus-live.in/

हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।[1] हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में विस्तृत है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिह्न हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, जल-खंडहर, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष…. आदि असंख्य इमारतें हैं।

हम्पी में विठाला मंदिर परिसर निःसंदेह सबसे शानदार स्मारकों में से एक है। इसके मुख्य हॉल में लगे ५६ स्तंभों को थपथपाने पर उनमें से संगीत लहरियाँ निकलती हैं। हॉल के पूर्वी हिस्से में प्रसिद्ध शिला-रथ है जो वास्तव में पत्थर के पहियों से चलता था। हम्पी में ऐसे अनेक आश्चर्य हैं, जैसे यहाँ के राजाओं को अनाज, सोने और रुपयों से तौला जाता था और उसे गरीब लोगों में बाँट दिया जाता था। रानियों के लिए बने स्नानागार मेहराबदार गलियारों, झरोखेदार छज्जों और कमल के आकार के फव्वारों से सुसज्जित होते थे। इसके अलावा कमल महल और जनानखाना भी ऐसे आश्चयों में शामिल हैं। एक सुंदर दो-मंजिला स्थान जिसके मार्ग ज्यामितीय ढँग से बने हैं और धूप और हवा लेने के लिए किसी फूल की पत्तियों की तरह बने हैं। यहाँ हाथी-खाने के प्रवेश-द्वार और गुंबद मेहराबदार बने हुए हैं और शहर के शाही प्रवेश-द्वार पर हजारा राम मंदिर बना है

साम्राज्य की राजधानी बनने से कई सालों पहले भी विजयनगर एक पवित्र और ज़रूरी शहर माना जाता था. तुंगभद्रा नदी के किनारे कई मंदिर हुआ करते थे. इस शहर को पवित्र इसलिए भी माना जाता था क्योंकि कुदरत ने इसे अनोखी और असाधारण खूबसूरती से नवाज़ा था.

हम्पी के आसपास मौजूद ग्रेनाइट पहाड़ियों की गिनती दुनिया के सबसे पुराने पत्थरों में की जाती है. करोड़ों सालों में ग्रेनाइट के बड़े-बड़े पत्थरों ने घिस-घिस कर छोटी पहाड़ियों का रूप ले लिया है. इनमें से कई पहाड़ियां, एक के ऊपर एक पड़े पत्थरों से बनी हैं. इस मंदिर के अवशेष हेमकूट पहाड़ी की चोटी पर पाए जाते हैं.

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