टाटा ने हाइड्रोजन से चलने वाली बस बनाई

टाटा मोटर्स और इंडियन ऑयल ने मिलकर हाइड्रोजन से चलने वाली बस बनाई है। इस बस को ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा। यह हाइड्रोजन से चलने वाली भारत की पहली बस है। इंडियन ऑयल का रिसर्च एंड डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट अपनी 57वां फाउंडेशन डे मना रहा है। टाटा मोटर्स और इंडियन ऑयल लंबे समय तक नए और स्वच्छ गतिशीलता समाधान की कुशलता और स्थायित्व को बेहतर ढंग से समझने के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल बस का लंबे समय तक परीक्षण करेंगे। ऐसी परियोजनाएं भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल पर रिफलेक्ट करती हैं। टाटा मोर्टस पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए क्लीन फ्यूल से चलने वाली बस लाकर इस मामले में आगे आ गया है।हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नॉलोजी पारंपरिक इंजन से लगभग तीन गुना ज्यादा बेहतर है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल एक बैटरी की तरह काम करता है लेकिन इसे बैटरी की तरह चार्ज नहीं करना पड़ता है। फ्यूल सेल तब तक बिजली और पानी जेनरेट करता है जब तक उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है।

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हनुवंतिया में हेलीकॉप्टर यात्रा शुरू……

मध्यप्रदेश के खंडवा में इंदिरा सागर बैकवाटर पर बने हनुवंतिया टापू में छठवां जल महोत्सव चल रहा है। इस बार पर्यटकों को लुभाने गुरुवार से हेलीकॉप्टर की व्यवस्था शुरू की, लेकिन पहले पर्यटकों को निराशा ही हाथ लगी। शुभारंभ के निर्धारित समय से पौने दो घंटे देरी से हेलीकॉप्टर लैंड हुआ, शाम करीब 5.30 बजे के आसपास सूर्यास्त होने की वजह से पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य व पानी को निहार नहीं सके।

पर्यटन विकास निगम व शाश्वत एविएशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में हनुवंतिया में हेलीकॉप्टर यात्रा शुरू कर दी गई है। प्राइवेट कंपनी द्वारा यात्रियों को 7 मिनट में 15 किलोमीटर की यात्रा जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस 7 मिनट में सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना, सिंगाजी धाम मंदिर, इंदिरा सागर जलाशय और बोरियामाल टापू जैसे अन्य कई स्थान पर्यटकों को दिखाए जाएंगे। हनुवंतिया में जल महोत्सव के दौरान हेलीकॉप्टर की सुविधा पहली बार शुरू की गई है। पहली बार 1 महीने तक हेलीकॉप्टर यात्रा की सुविधा रहेगी।

निर्धारित तय समय अनुसार हेलीकॉप्टर 16 दिसंबर को सुबह 10 बजे हनुवंतिया पहुंचना था लेकिन शाम 4.45 बजे आया, क्योंकि शाश्वत एविएशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का ये हेलीकॉप्टर अकाेला से देरी से आया। इस वजह से लेटतलीफी रही। उधर, हेलीकॉप्टर का औपचारिक शुभारंभ भी लगभग शाम 5.30 बजे हुआ, क्योंकि पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर, पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, शिल्पा गुप्ता ने देरी से वीडियो कांफ्रेंसिंग ज्वाइन किया। इन्हीं सभी कारणों की वजह से हेलीकॉप्टर यात्रा के शुभारंभ का पहला दिन औपचारिक ही बनकर रह गया।

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अब ऑफलाइन ही होंगी कॉलेज परिक्षाएं, जल्द तय होगा फॉर्मूला -मोहन यादव उच्च शिक्षामंत्री मध्यप्रदेश

Campuslivenews@…इंदौर। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉलेज एग्जाम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, कॉलेज के एक्जाम ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन होंगे। इसका फॉर्मूला जल्दी तय किया जाएगा। परीक्षा को लेकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।कोरोना के कारण लगाए गए प्रतिबंध और नियमों में बदलाव कर अब सभी कॉलेजों में ऑफलाइन एग्जाम कराने की तैयारी है। कोरोना के बाद लगाए गए सभी प्रतिबंध शासन ने हटा लिए हैं। गत वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण कुछ विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन तो कुछ ने ओपन बुक पद्धति से परीक्षाएं कराई थीं। मंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण कम होने के बाद अब सेमेस्टर और एनुअल एग्जाम ऑफलाइन ही होंगे। यानी छात्र-छात्राओं को परीक्षा केंद्रों पर जाना होगा। पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उससे जुड़े कॉलेजों में एक रूप में एग्जाम होंगे।

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खूबसूरत चेहरे के साथ कॉफी से बना ये फेसपैक आपके लिए परफेक्ट

बेदाग और निखरी त्वचा भला किसकी चाहत नहीं होती। लेकिन बिना मेहनत किए आपको खूबसूरत बेदाग स्किन मिलना काफी मुश्किल है। खूबसूरत और बेदाग स्किन के लिए न सिर्फ हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी खानपान की जरूरत है बल्कि स्किन की सही देखभाल भी बहुत ही जरूरी है। हालांकि मार्केट में कई तरह के प्रोडक्ट्स मिल जाते हैं जो स्किन को चमकदार बनाने के साथ-साथ दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाते हैं लेकिन इनके अंदर के कैमिकम आगे जाकर नुकसानदेय होते हैं।

अगर आप नैचुरल तरीके से खूबसूरत चेहरे के साथ स्किन संबंधी हर समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कॉफी से बना ये फेसपैक आपके लिए परफेक्ट है। जानिए इसे घर में कैसे बनाकर आप खूबसूरत चेहरा पा सकते हैं।  

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ग़ुलाम हैदर: जिन्होंने लता, नूरजहां और शमशाद बेगम जैसी आवाज़ें फ़िल्मी दुनिया को दीं

फ़िल्म संगीत में मास्टर ग़ुलाम हैदर का वही स्थान है, जो फिज़िक्स में अल्बर्ट आइंस्टाइन और सर आइज़ैक न्यूटन का है. उन्होंने 90 साल पहले फ़िल्म संगीत के डीएनए का आविष्कार किया था. लगभग एक सदी बाद आज भी, रचना के मामले में फ़िल्म का प्लेबैक म्यूज़िक उसी अंदाज़ का है.

मास्टर जी को ये सम्मान हासिल है कि उन्होंने उपमहाद्वीप के संगीत को मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहां और लता मंगेशकर जैसी सुरीली आवाज़ों का तोहफ़ा दिया. इतना ही नहीं बल्कि मास्टर ग़ुलाम हैदर ने ही 12 साल की उम्र में लोगों से शमशाद बेगम का परिचय कराया, जो बाद में अविभाजित भारत की पहली प्रसिद्ध फ़िल्म गायिका बनीं.

चूंकि शमशाद बेगम इस क्षेत्र की पहली प्लेबैक सिंगर थीं, इसलिए ही नूरजहां और लता मंगेशकर सहित उनके बाद आने वाली गायिकाओं ने शमशाद बेगम की शैली का उपयोग करते हुए गायकी के अपने अनोखे अंदाज़ की बुनियाद रखी.

मास्टर ग़ुलाम हैदर ने ही 74 साल पहले लता मंगेशकर की क्षमताओं को पहचाना था, जब वो कमर्शियल बाजार में एक ‘कोरस गर्ल’ थीं. बीबीसी उर्दू से बात करते हुए लता मंगेशकर को ये बातें बिलकुल ऐसे याद थी, जैसे कल की ही बात हो.

sorce-bbc

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